आपदा के कारण बदरीनाथ धाम की यात्रा में कई बाधाएं पैदा हुई। 16/17 जून की जलप्रलय के बाद धाम में फंसे करीब 15 हजार तीर्थयात्रियों को भी आस्था की अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ा था। करीब तीन हजार तीर्थयात्रियों को इसी दौरान सिखों के प्रसिद्ध धाम हेमकुंड साहिब में भी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा था।
42 लाख लोगों ने किए दर्शन्ा
उत्तराखंड में आई आपदा के बावजूद धाम में 4 लाख 89 हजार 924 तीर्थयात्रियों ने मत्था टेका। पिछले वर्ष 10 लाख 42 हजार 215 तीर्थयात्रियों ने बदरीविशाल के दर्शन किए थे। इस वर्ष जलप्रलय के बाद विकट हो चली तीर्थयात्रा के बावजूद 2 जुलाई से 18 नवंबर तक करीब 40 हजार तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम में मत्था टेकने पहुंचे।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि आपदा के कारण इस वर्ष तीर्थयात्रियों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ी, लेकिन आपदा पर आस्था भारी पड़ी। देश-विदेश के कई तीर्थयात्री जोशीमठ से बदरीनाथ तक करीब 50 किमी की पैदल दूरी तय कर धाम में मत्था टेकने पहुंचे। आगामी वर्ष की तीर्थयात्रा को भव्य रूप दिया जाएगा।
कटु अनुभव लेकर लौटे ग्रामीण
आपदा के कारण माणा और बामणी गांव के ग्रामीण भी बदरीनाथ से कटु अनुभव लेकर लौटे। आपदा के दौरान इन दोनों सीमावर्ती गांवों के ग्रामीणों ने तीर्थयात्रियों के लिए अपने घरों में रखी खाद्यान्न सामग्री जुटाई थी। हालांकि बाद में राहत के लिए दोनों गांवों के ग्रामीणों को शासन-प्रशासन का मुंह ताकना पड़ा था।
आपदा के कारण बदरीनाथ हाईवे तीन माह तक ठप रहा था, जिससे माणा गांव के ग्रामीणों को मटर, आलू, राई, पालक और गोभी की सब्जी को औने-पौने दाम में बेचनी पड़ी।