केदारनाथ मंदिर के संरक्षण का कार्य अगर पहले ही आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) के पास होता तो शायद संरक्षण की वजह से कुछ नियम-कायदे का पालन होता। उतना नुकसान भी न होता, जितना हुआ। आपदा के बाद सभी चेत गए हैं। मौसम ने अगर साथ दिया तो एएसआई की टीम रविवार सुबह यहां से केदारघाटी के लिए रवाना होगी।
जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (जीएसआई) के कुछ विशेषज्ञ भी इस टीम में शामिल हैं। यह टीम केदारनाथ के पुनरुद्धार के उपायों पर गौर करेगी और जरूरी सुझाव देगी। उधर, एएसआई के विशेषज्ञों की टीम शाम को दून पहुंच गई। इसमें एडिशनल डायरेक्टर जनरल वीआर मणि, डायरेक्टर (कंजरवेशन) ज्ञानवेश शर्मा, डायरेक्टर (मान्यूमेंट्स) एके सिन्हा, कंजरवेशन आफिसर अमरनाथ गुप्ता शामिल हैं।
एएसआई (दून सर्किल) के सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलाजिस्ट अतुल भार्गव के अनुसार टीम यह पता लगाएगी कि आपदा से मंदिर को किस-किस जगह पर नुकसान हुआ है। इसके बाद वह सुझाव देगी कि इसे संरक्षित किए जाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है।
जीएसआई के विशेषज्ञ मंदिर के आस-पास की भूगर्भिक स्थिति का पता लगाकर यह जानने की कोशिश करेंगे कि भविष्य में किस तरह की करवट मिट्टी की परत ले सकती है। बाबा केदार के दर पर निर्माण की हद क्या होनी चाहिए।