केदार घाटी में 16 जून को आई तबाही से क्षतिग्रस्त हुआ गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल मार्ग के बदले सेना एक वैकल्पिक मार्ग तैयार कर रही है। यह मार्ग रामबाड़ा, जंगलचट्टी, गुरुड़चट्टी वाली पहाड़ी के दूसरी तरफ से होकर निकलेगा।
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रामबाड़ा वाला पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त होने और बारिश से हेलीकाप्टर उड़ान प्रभावित होने के बाद वैकल्पिक मार्ग बनाने की मांग राज्य सरकार ने सेना से की थी। सेना ने सोनप्रयाग से अपनी दो टीमें तैनात कर कार्य शुरू कर दिया है। नया पैदल मार्ग मौजूदा 14 किलोमीटर मार्ग की जगह 20 किलोमीटर लंबा है।
धुनगज गिरी होते हुए केदारनाथ तक
सेना ने सोनप्रयाग से केदारनाथ तक सड़क निर्माण का कार्य 10 जुलाई से ही शुरू कर दिया है। इसके लिए चार सैन्य अधिकारियों के अधीन 21 सदस्यीय टीम सोनप्रयाग से वासुकी गंगा को पार कर पैदल रूट का निर्धारण करने जुटी गई है। यह सड़क सोनप्रयाग-गोमकारा-देव विष्णु से धुनगज गिरी होते हुए केदारनाथ तक जाएगी।
सेना ने गोमकारा में पैदल मार्ग पर एक पड़ाव भी बनाया है, जिससे ट्रैक पर गुजरने वाले दलों को सुरक्षित स्थान मिल सके। सेना ने बृहस्पतिवार को अपनी दूसरी टीम भी उपकरणों के साथ रवाना कर दी। गोमकारा से टीम देव विष्णु की ओर ट्रैक को बना रही है। देव विष्णु से चार किलोमीटर धुनगज गिरी होते हुए मार्ग केदारनाथ पहुंचेगा। सेना ने शुक्रवार शाम तक रूट के निर्माण को पूरा करने का दावा जताया है।
शवों के बीच से नहीं गुजरना पड़ेगा
सैलाब से तबाह हुए रामबाड़ा, जंगलचट्टी, गुरुड़चट्टी नए पैदल मार्ग वाली पहाड़ी के दूसरी तरफ हैं। इससे केदारनाथ तक जाने वाले लोगों को न तो क्षतिग्रस्त मार्गों से और न ही लाशों के ढेर से गुजरना नहीं पड़ेगा। प्रभावित क्षेत्रों को नए मार्ग से अलग करने से शवों के दाह संस्कार में जुटे एनडीआरएफ और राज्य पुलिस बल के जवानों के कार्य में बाधा भी नहीं आएगी।
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