बीजेपी के विधानसभा कूच के दौरान घायल हुए पुलिस के घोड़े 'शक्तिमान' की गुरुवार को हालत बिगड़ गई है। डॉक्टरों की टीम उपचार में लगी है। उधर, 14 मार्च को बीजेपी रैली के दौरान घुड़ सवार पुलिस कर्मी के हाथ से चाबुक खीचने वाले बीजेपी नेता प्रमोद बोहरा को पुलिस ने हल्द्वानी से गिरफ्तार कर लिया है।
विज्ञापन
देहरादून में भाजपा विधानसभा घेराव के दौरान चोटिल हुए "शक्तिमान" को देखने के लिए मुंबई से दो एक्सपर्ट चिकित्सक गुरुवार शाम को दून पहुंच जाएंगे। अमेरिका की भी एक लेडी चिकित्सक ने घोड़े के उपचार के लिए भारत आने की हॉमी भरी है, फिलहाल वह भूटान में है। वह भी गुरुवार शाम को दून पहुंच जाएंगी। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकारी खर्च पर उन्हें बुलाने की हरी झंडी देने के बाद कप्तान ने उन्हें बुला लिया है।
गुरुवार को मसूरी से बीजेपी विधायक गणेश जोशी शक्तिमान का हाल चाल पूछने गए। उधर, मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि विधायक के खिलाफ केस वापस नहीं होगा। शक्तिमान के उपचार में पुलिस और सरकार किसी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं है। खुद सीएम हरीश रावत घोड़े "शक्तिमान" का हाल जानने के लिए दो बार अस्पताल आ चुके हैं।
विज्ञापन
एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलकर बताया कि मुंबई के दो एक्सपर्ट डॉ. देश मुख और एक अन्य महिला सर्जन सिर्फ आने-जाने के खर्च पर "शक्तिमान" का उपचार करने के लिए तैयार हैं। इसी तरह अमेरिका की लेडी चिकित्सक ने "शक्तिमान" का उपचार करने की बात कही।
मुख्यमंत्री रावत ने "शक्तिमान" के ट्रीटमेंट में खर्च में कमी न आने देने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक्सपर्ट को जल्द से जल्द बुलाया जाए। एसएसपी डॉ. दाते ने बताया कि मुंबई से एक्सपर्ट चिकित्सक गुरुवार शाम तक यहां पहुंच जाएंगे।
वीडियो वार में फंसा ‘शक्तिमान’
भाजपा विधायक गणेश जोशी
- फोटो : amar ujala
"शक्तिमान" के पैर की हड्डी टूटने का बहुचर्चित प्रकरण वीडियो वार में फंसा है। पुलिस जहां कानूनी शिकंजा कसने के लिए उसमें साक्ष्य ढूंढ रही है तो भाजपा अपने हिसाब से उसमें बचाव का रास्ता तलाश रही है। एक-एक कर कई कैमरों के फुटेज सामने आ गए है, जिन्हें लेकर सड़क से लेकर विधानसभा तक घमासान है। राजनीतिज्ञ हो या अफसर या फिर सरकार के मंत्री हर कोई वीडियो फुटेज में उलझा है। शह और मात के खेल में जीत किसकी होगी, यह देखना दिलचस्प रहेगा।
भाजपाइयों के प्रदर्शन को तीसरी आंख में कैद करने के लिए बन्नू स्कूल से लेकर रिस्पना पुल तक पूरे इंतजाम थे। खासतौर से रिस्पना पुल से पहले बनाए बैरियरों पर आठ से लेकर दस कैमरे लगे थे। बैरियर को ध्वस्त कर भाजपाई रिस्पना पुल की तरफ पहुंच जाएंगे, इस बात की आशंका पुलिस को कम ही थी। मीडिया की निगाहें भी मेन बैरियर पर टिकी थी।
कई विधायकों के अलावा युवा कार्यकर्ताओं के बैरियर पार कर लिए जाने के पुलिस रणनीति फेल हो गई। भाजपाइयों को रोकने को धक्का-मुक्की में बहुत कुछ होता चला गया। दुखद पहलू यह रहा कि बेजुबान "शक्तिमान" को अपने पैर की हड्डी गंवानी पड़ी। उस समय वहां सिर्फ दो सरकारी कैमरे थे, जबकि अन्य प्राइवेट थे। कुछ न तो मोबाइल के जरिए पूरा घटनाक्रम कैद गया।
विधायक गणेश जोशी के अलावा अन्य भाजपाइयों के खिलाफ मुकदमे हुए तो वीडियो वार शुरू हो गया। जिस वीडियो के आधार पर जोशी नामजद हुए तो भाजपा की तरफ से दूसरा वीडियो जारी कर दिया गया, जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं की खींचतान में "शक्तिमान" का पैर लोहे की पाइप में फंसने और गिरने का फुटेज दिख रहा है।
पुलिस और भाजपाइयों में वीडियो फुटेज जुटाने की होड़ मची है, ताकि अपने-अपने पक्ष को मजबूत किया जा सके। बाकायदा उसको लेकर कानूनी राय मशविरा भी दोनों स्तरों से हो रहा है। इस वीडियो वार का नतीजा तो अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन पुलिस और भाजपा के सामने सही और गलत साबित करने की चुनौती बरकरार है।
कैमरे का फोकस था अलग
बैरियर के पार वैसे तो सीसीटीवी कैमरा भी लगा था, लेकिन पूरा घटनाक्रम उसके फोकस से दूर था। घटना के बाद उसे खंगाला गया तो उसमें वो नहीं था, जिसकी चाहत थी।
भाजपा नेताओं ने बुधवार को विधानसभा में अपने एक कार्यकर्ता के गंभीर रूप से घायल होने का मामला उठाया था। साथ ही सवाल उठाए थे कि घायल को देखने कोई अस्पताल नहीं गया जबकि पुलिस के उत्पीड़न के चलते उसे लकवा हो गया है।दूसरी ओर डॉक्टरों ने उस कार्यकर्ता को पूरी तरह फिट और सामान्य बताया है। उसने खुद माना कि सभी तरह की जांच रिपोर्ट सामान्य है और आज अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी।
भाजपा के विधानसभा कूच के दौरान घोड़े का पैर टूटने के मामले में फजीहत झेल रही भाजपा ने अपने एक कार्यकर्ता के गंभीर रूप से घायल होने का आरोप लगाया था। भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान घोड़े के पांवों तले कुचले गए जितेंद्र रावत मोनी के पैरों में बहुत ज्यादा चोट आई है। गंभीर हालत में उन्हें सीएमआई अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बाद में भाजपाइयों ने मोनी को पैरालिसिस होने का मुद्दा उठाया। हालांकि चिकित्सकों के अनुसार पहले दिन से ही मोनी को कोई गंभीर चोट नहीं थी। उसका उपचार कर रहे सीएमआई अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डा. एचके जौहरी ने बताया कि जांच में मोनी के पैर सामान्य मिले थे। हालांकि दर्द की शिकायत के बाद ऐहतियातन उन्हें भर्ती किया गया था।
बुधवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जानी थी। खुद मोनी ने भी अस्पताल से जाने की तैयारी कर ली थी। हालांकि देर शाम उन्होंने बताया कि एक्सरे समेत उनकी सभी रिपोर्ट सामान्य आई है हालांकि मांस फटने से उन्हें दर्द हो रहा है। चिकित्सकों की सलाह पर वह अब बृहस्पतिवार को अस्पताल से डिस्चार्ज होंगे।
मोनी को जब भर्ती किया तब भी उसकी हालत सामान्य थी। सभी रिपोर्ट सामान्य मिलने के बाद बुधवार को ही मरीज को डिस्चार्ज करने का निर्णय लिया गया। मरीज को अस्पताल में रखने की जरूरत नहीं है। पैर में किसी तरह का फ्रैक्चर नहीं है।
- डॉ. एचके जौहरी, ऑर्थोपेडिक सर्जन
एक घायल अभी भी भर्ती
विधानसभा कूच के दौरान घायल हुए भाजपा कार्यकर्ता लल्लन सिंह (42) का स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है।राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के चिकित्साधीक्षक डा. केके टम्टा ने बताया कि उनके दिमाग में खून बहा है, जिससे मरीज को बोलने में दिक्कत हो रही है। हालांकि मरीज को ऑपरेशन की जरूरत नहीं है। कुछ समय में दवाओं से स्थिति सामान्य होजाएगी। उन्होंने बताया कि हल्द्वानी निवासी दूसरे घायल धर्मानंद जोशी को बुधवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।