डॉ. प्रांशु।
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अल्मोड़ा। भारत में 2025 तक टीबी को जड़ से खत्म करने का अभियान तेजी से चल रहा है। दरअसल, कोरोना का प्रकोप बढ़ा तो पहाड़ों में कोरोना की जांच करने के लिए ट्रू-नेट मशीनें लगाई गई। अब इन मशीनों से टीबी की जांच भी की जाने लगी है। पहले लोग टीबी से संबंधित बीमारी का इलाज करवाने के लिए अल्मोड़ा या अन्य नगरों का रुख करते थे लेकिन अब उन्हें घर के पास ही जांच की सुविधा मिल रही है।
इस मशीन की खासियत यह भी है कि इसमें मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) के मरीजों का भी पता आसानी से चल जाता है, जिन्हें टीबी की दवा पूरी तरह से असर नहीं कर पाती है। ऐसे मरीजों का यह मशीन बड़ी आसानी से पता लगा लेती है। रानीखेत, धौलादेवी और चौखुटिया की बड़ी आबादी को इस मशीन के लगने से लाभ मिलेगा। इसके लिए इन जगहों पर पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था भी की गई है।
दो घंटे में आ जाती है रिपोर्ट
अल्मोड़ा। पहले टीबी की जांच करने में एक से दो दिन का समय लग जाता था, लेकिन अब इस मशीन के लगने के बाद दो घंटे के भीतर ही मरीज के सैंपल की जांच हो जाती है।
बिजली नहीं है तो भी होगी जांच
अल्मोड़ा। ट्रूू-नेट मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि इस मशीन को ऑपरेट करने के लिए इसमें बैटरी सिस्टम भी लगा हुआ है। यदि कभी बिजली नहीं होती है तो भी मरीज के सैंपल की जांच आसानी से कर ली जाती है।
अब तक जिन लोगों को बलगम जांच के अल्मोड़ा आना पड़ता था। अब वह रानीखेत, धौलादेवी और चौखुटिया में ही जांच करवा सकते हैं। टीबी की जांच के लिए लिए इन अस्पतालों में आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाई गई है। लोग इसका लाभ ले सकते हैं।
- डॉ. प्रांशु, मेडिकल ऑफिसर, जिला क्षय रोग अस्पताल, अल्मोड़ा