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भू-कानून की मांग को लेकर गरजी उक्रांद

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अल्मोड़ा में जुलूस निकाल प्रदर्शन करते उक्रांद कार्यकर्ता। (संवाद) - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। भू-कानून समेत विभिन्न मांगों को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल मुखर हो गया है। बृहस्पतिवार को उक्रांद अल्मोड़ा इकाई ने राज्य में जमीनों की अंधाधुंध खरीद फरोख्त को रोकने, भू-कानून बनाए जाने समेत तमाम मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नगर में जुलूस निकाल कलक्ट्रेट में जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी प्रेषित किया।
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चौघानपाटा में धरने पर बैठे उक्रांद कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रदेश में लगातार हो रही जमीनों की अंधाधुंध खरीद फरोख्त को रोकने की जरूरत है। यहां भी हिमाचल प्रदेश की तर्ज में सशक्त भू-कानून बनना चाहिए। लंबे समय से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग की जा रही है लेकिन अब तक इसे राजधानी नहीं बनाया गया। उक्रांद ने नौकरियों के लिए मूल निवास प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने, राज्य को पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने, जंगली और लावारिस पशुओं के आतंक से निजात दिलाने समेत तमाम मांगें उठाईं। कार्यकर्ताओं ने नगर में जुलूस भी निकाला। वहां जिलाध्यक्ष शिवराज बनौला, ब्रह्मानंद डालाकोटी, महेश परिहार, गिरीश साह, मुमताज कश्मीरी, पान सिंह रावत, गोपाल सिंह मेहता, गिरीशनाथ गोस्वामी आदि थे।
पृथक भू कानून की बात ठीक, लेकिन पहले भूमि बंदोबस्ती हो
रानीखेत (अल्मोड़ा)। सेवानिवृत्त राजस्व उपनिरीक्षक बंशीधर मठपाल ने कहा कि बंदोबस्ती नहीं होने से ही चकबंदी का मसला परवान नहीं चढ़ पा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का पृथक भू कानून होना चाहिए, लेकिन सबसे पहली जरूरत भूमि बंदोबस्त की है। आजादी के बाद पहला भूमि बंदोबस्त 1956-57 से शुरू हुआ। 1966 में इसका गजट नोटिफिकेशन हुआ। लेकिन उसके बाद सरकारों ने बंदोबस्त की तरफ मुड़कर नहीं देखा। इसके चलते रास्ते और सड़कों से संबंधित विवाद बढ़ते जा रहे हैं।
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दलों द्वारा पृथक भू कानून का समर्थन उपपा विचारधारा की जीत:तिवारी
रानीखेत (अल्मोड़ा)। उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा है कि प्रदेश में जमीनों के सवाल पर उपपा ने ही सर्वाधिक संघर्ष किया है। भाजपा और कांग्रेस ने बारी बारी से प्राकृतिक संसाधनों की लूट मचाई और भू माफियाओं को संरक्षण प्रदान किया। कहा कि वर्तमान में पृथक भू कानून का समर्थन सभी दल करने लगे हैं, यह उपपा की विचारधारा की जीत है। उन्होंने कहा कि इस पर अमल होना जरूरी है, नहीं तो अन्य घोषणाओं की तर्ज पर यह मुद्दा पर भी चुनावी मुद्दा बनकर रह जाएगा।
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