बागेश्वर। जिले की चार महिलाओं को वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। ताइक्वांडो खिलाड़ी रुचि कालाकोटी, सामाजिक कार्यकर्ता ममता मेहता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हंसी धपोला, गायत्री दानू को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। चयनित महिलाओं ने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर इस सम्मान पाया है।
रुचि ने 11 वर्ष के कॅरियर में हासिल किए 11 पदक
बागेश्वर। ताइक्वांडो खिलाड़ी रुचि कालाकोटी ने 11 वर्ष के कॅरियर में एक स्वर्ण समेत 11 पदक जीते हैं। उन्होंने आठ वर्ष की उम्र से ताइक्वांडो की शुरुआत की थी। कोच कमलेश तिवारी और किरन नेगी के मार्गदर्शन में उन्होंने खेल की बारीकियां सीखीं। 2010 से उन्होंने प्रतियोगिताओं में भागीदारी शुरू कर दी थी।
बीपीएड तक पढ़ चुकी रुचि ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में एक स्वर्ण, पांच रजत और पांच कांस्य पदक जीते हैं। उन्होंने गोवा में 2011-12 हुई राष्ट्रीय सब जूनियर ताइक्वांडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। उनका अंतिम पदक 2019-20 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में आया। चेन्नई में हुई इस प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक जीता था।
कड़ी मेहनत के दम पर इस मुकाम तक पहुंचने वाली रुचि ने सफलता का श्रेय पिता बलवंत सिंह कालाकोटी, माता कमला कालाकोटी और कोच को दिया। रुचि अच्छी एथलीट भी हैं। वह बचपन से ही जिला स्तरीय क्रॉस कंट्री में प्रतिभाग करती रहीं हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कराटे प्रतियोगिता में भी खेला है।
विषम परिस्थितियों में जनसेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य
बागेश्वर। मदर टेरेसा को अपना आदर्श मानने वाली कपकोट गांव की ममता मेहता बचपन से ही सामाजिक कार्यों में भागीदारी करती हैं। आठ अगस्त 2017 को पति की असमय मौत से वह टूट गई। ऐसे समय में उन्होंने जनसेवा को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। उन्हें मायके और ससुराल वालों का बहुत सहयोग मिला। वर्ष 2018 उन्हें ग्राम्या परियोजना से जुड़ने का मौका मिला।
तब से वह ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का जीवन सुधारने में लग गई। उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया और शामा, लीती, गोगिना, कीमू, मल्खाडुंगर्चा, भनार, लाथी, नामतीचेटाबगड़, चुचेर, सुखचौना, कालापैरकापड़ी, किसलिला गांवों में जाकर महिलाओं को मशरूम उत्पादन सिखाया।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 300 विकलांग, वृद्धावस्था और किसानों को पेंशन योजना का लाभ दिलवाने में मदद की है। उनसे प्रशिक्षण लेकर 40 महिलाएं मशरूम उत्पादन कर रही हैं। समाजसेवा के साथ वह अपने 12 वर्ष के इकलौते बेटे का भविष्य संवारने में जुटी हैं। तीलू रौतेली पुरस्कार से मिलने वाली राशि का उपयोग वह बच्चों की शिक्षा पर करना चाहतीं हैं।
गायत्री ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों को किया प्रेरित
बागेश्वर। कपकोट तहसील के कर्मी के टानी तोक निवासी गायत्री दानू ने दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को बाल विकास विभाग की प्रधानमंत्री मातृ वंदना, नंदा गौरा कन्याधन योजनाओं का लाभ दिलाया। उन्होंने गांव में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की अलख जगाई। ग्रामीणों को लड़कों के समान लड़कियों को भी शिक्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
वर्ष 2011 से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में सेवा दे रही गायत्री ने बीएलओ, पल्स पोलियो उन्मूलन अभियान, कोविड संक्रमण की रोकथाम, टीकाकरण आदि योजनाओं में उत्कृष्ट कार्य किया है। लोगों को प्रेरित करने के साथ वह अपनी दो पुत्रियों को भी बेहतर शिक्षा दिला रही हैं। वह अपनी बेटियों को भी अच्छा इंसान बनने और समाजहित के लिए निरंतर कार्य करने को प्रेरित करती हैं।
हंसी ने विभागीय योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाया
बागेश्वर। तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चयनित कांडा तहसील के मुस्यौली गांव की हंसी धपोला ने विभागीय योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उत्कृष्ट कार्य किया। उन्होंने अपने क्षेत्र में बालिकाओं को उच्च शिक्षा पाने के लिए प्रेरित किया।
ग्रामीणों को विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। विभागीय कार्यों के साथ सामाजिक क्षेत्र में भी वह लगातार योगदान देती हैं। उनके कार्यों को देखते हुए विभाग ने उनका नाम पुरस्कार के लिए भेजा था। उन्होंने भविष्य में भी समाजहित में कार्य करने की बात कही।
खेलों में देश के लिए पदक जीतना चाहती हैं कनिष्का
अल्मोड़ा। ताइक्वांडो में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए नगर के पूर्वी पोखरखाली निवासी कनिष्का भंडारी का चयन राज्य स्तरीय तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए हुआ है। इस पर नगर में खुशी की लहर है। कनिष्का सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष में पढ़तीं हैं। कक्षा चार से ही कनिष्का ताइक्वांडो के दाव पेंच सीखने लगी थीं। कनिष्का ने कई पद जीते हैं।
वर्ष 2012 में अमृतसर में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कनिष्का ने कांस्य पदक जीता। वर्ष 2017 में जालंधर में हुई ओपन नेशनल ताइक्वांडो में कांस्य पदक, चेन्नई में वर्ष 2018 में हुई जूनियर नेशनल ताइक्वांडो में रजत पदक जीता। तालकटोरा स्टेडियम नई दिल्ली में हुई अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। कर्नाटक में हुई जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। इंफाल मणिपुर में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता।
अब कनिष्का एशियन गेम्स और ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतना चाहतीं हैं। कनिष्का के पिता इंद्रमोहन सिंह भंडारी व्यवसायी और माता रंजना भंडारी गृहिणी हैं। इंद्रमोहन और रंजना ने कहा कि तीलू रैतेली पुरस्कार के लिए बेटी का चयन होना गर्व की बात है। कनिष्का ने माता, पिता, कोच कमल कुमार बिष्ट को सफलता का श्रेय दिया है।
भावना को मिला महिला सशक्तीकरण का पुरस्कार
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। तहसील क्षेत्र के ग्राम पीपलधार निवासी भावना शर्मा का चयन तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए हुआ है। भावना पिछले पांच वर्षों से महिला सशक्तीकरण और महिला स्वरोजगार के लिए कार्य कर रहीं हैं। 10 साल तक पढ़ाने के बाद उन्होंने गेवाड़ संकल्प समिति का रजिस्ट्रेशन कर महिला समूह बनवाए। पहले खुद प्रशिक्षण लिया और फिर महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में मशरूम प्रशिक्षण लेकर 1000 महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया। वे महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, मशरूम उत्पादन, कंप्यूटर, खेती, पॉलीहाउस, वर्मी कंपोस्ट, फ़ूड प्रोसेसिंग, ऐपण बनाने का निशुल्क प्रशिक्षण दे रहीं हैं। उत्तराखंड स्किल डेवलपमेंट, जल जीवन मिशन, बाल विकास, पंचायत राज, बागवानी आदि पर कार्य करने के साथ ही महिलाओं के तैयार उत्पादों को बाजार दिलवाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने पिता गोपाल दत्त कांडपाल, माता विमला देवी, पति मनोज शर्मा सहित विभागीय अधिकारियों को भी सफलता का श्रेय दिया है।
रणखिला की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुष्पा उत्कृष्ट पुरस्कार के लिए चयनित
अल्मोड़ा। हवालबाग में रणखिला की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुष्पा प्रहरी का चयन राज्य स्तरीय उत्कृष्ट आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार के लिए हुआ है। वह केंद्र के माध्यम से लाभार्थियों को सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करातीं हैं, वह गरीब बच्चों की मदद के लिए भी तत्पर रहतीं हैं। आंगनबाड़ी केंद्र रणखिला में पांच वर्ष तक के 25 बच्चे पंजीकृत हैं।
वह बच्चों को पोषाहार देने, टीएचआर उपलब्ध कराने के साथ ही गर्भवती और धात्री महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए हमेशा तत्पर रहतीं हैं। वहीं वह अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए ग्रामीणों के फार्म भराने समेत अन्य मदद करती हैं। वहीं स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से गरीब बालिकाओं को कपड़े, शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराती हैं।
वह अपने भाई आनंद प्रहरी ने मिशन बचपन स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को कापी, किताबें देकर मदद करती हैं। उनके पति विजय प्रकाश द्वाराहाट ब्लॉक के जीआईसी श्रीखेत में कनिष्ठ लिपिक हैं।