रानीखेत का ब्लॉक मुख्यालय ताड़ीखेत
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। उपमंडल क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जलाने वाला ताड़ीखेत कस्बा भी विकास की मुख्य धारा कटा है, ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद यहां कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था तक नहीं है। कई जगह कूड़े के ढेर दुर्गंध फैला रहे हैं। कस्बे की सड़क बदहाल है, पीने के पानी के लोग आए दिन परेशान रहे हैं, जबकि यहां दो पेयजल योजनाएं हैं। लोग हैंडपंपों और पारंपरिक पेयजल स्रोतों पर निर्भर होकर रह गए हैं।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 1925 में ताड़ीखेत आए थे, उन्होंने यहां से पूरे उपमंडल क्षेत्र में आजादी की अलख जलाई, बाद में यहीं से आजादी के आंदोलनों की रणनीति बनाई जाती थी। दूसरी तरफ यह पूरे उपमंडल क्षेत्र का सबसे बड़ा ब्लॉक भी हैं, लेकिन कस्बे की तमाम समस्याएं जस की तस पड़ी हैं। पानी की दो योजनाएं यहां बनी हैं, आधी आबादी के लिए ऋषिगाड़ पेयजल योजना से तो आधी आबादी के लिए गगास पेयजल योजना बनाई है, लेकिन अधिकांश लोग पानी के लिए परेशान रहते हैं।
लोगों का कहना है कि तीन दिन में बमुश्किल पानी आता है, वह भी पर्याप्त नहीं होता, लोग दूरदराज के पारंपरिक पेयजल स्रोतों से पानी लाने को मजबूर रहते हैं। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था न होने के कारण कई जगह कूड़े के ढेर लगे हैं, तीव्र दुर्गंध से लोगों का जीना दूभर हो रहा है।
यहां नवोदय विद्यालय, गोलू देवता का प्रख्यात मंदिर भी है। नवयुवक मंगल दल के सदस्य मंजीत भगत ने बताया कि कस्बे में लगी स्ट्रीट लाइटों का बिल भी स्थानीय युवाओं ने चंदा एकत्रित कर जमा कर रहे हैं। दो नए शौचालय बनाए गए हैं, पुराने शौचालय कूड़े से पटे हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत की घोषणा के बाद अब श्रद्धानंद मैदान का जीर्णोद्धार शुरू हो गया है, जबकि गांधी कुटीर का भी सुंदरीकरण हो रहा है। उन्होंने कस्बे के विकास की मांग की है।