अल्मोड़ा। कोरोनाकाल में एक तरफ कोविड-19 से बच्चों को बचाना था तो दूसरी तरफ उनकी पढ़ाई का भी ख्याल रखना था। अभिभावक और शिक्षकों ने इस चुनौती से पार पाया और बच्चों को परीक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार किया। अब बच्चे भी हाईस्कूल और इंटर बोर्ड परीक्षाओं के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
अभिभावकों ने बताया कि कोरोनाकाल में बच्चों ने ऑनलाइन ही पढ़ाई की। बच्चे पूरे दिन घर पर रहे। उन पर हमने पूरी निगरानी रखी। उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। घर पर ज्यादा समय रहने से बच्चों ने भी पढ़ाई से संबंधित अपनी समस्याएं हमें बताई। जिसका समाधान किया गया। इससे बच्चों को घर पर ही एक अच्छा माहौल मिला। कई बार बच्चों से सवाल को लेकर भी चर्चा हो जाती है। शिक्षकों ने बच्चों को ऑनलाइन तो पढ़ाया ही साथ ही पढ़ाई से संबंधित उनकी समस्याओं का समाधान भी किया। ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने पर शिक्षकों ने बच्चों को बोर्ड परीक्षा की तैयारियां कराई। बच्चों को परीक्षा में सवालों के जवाब देने, अच्छे अंक प्राप्त करने समेत कई टिप्स दिए।
क्या कहते हैं अभिभावक, शिक्षक
कोरोनाकाल में बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित किया। घर पर उसे अच्छा शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया। इससे बच्चों की बेहतर पढ़ाई हो पाई। अब बच्चे बोर्ड परीक्षाओं के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
- जीवन सिंह, अभिभावक अल्मोड़ा
इंटरनेट की रफ्तार धीमी होने से कई बार पढ़ाई में व्यवधान हुआ फिर बच्चों ने परीक्षाओं की पूरी तैयारियां की है। बच्चों को घर पर ही स्कूल जैसा वातावरण देने का प्रयास किया गया।
- पूरन शर्मा, अभिभावक अल्मोड़ा
घर पर रहने से बच्चों की पढ़ाई के साथ ही अच्छी देखरेख भी हो पाई। बच्चों ने परीक्षा के लिए अच्छी तैयारियां की है। उम्मीद है कि वह परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करेंगे।
- संतोष सिंह, अभिभावक अल्मोड़ा
ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया गया। बच्चों की टॉपिक को अच्छी तरह से समझाया गया। परीक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी उन्हें दी गई। जिससे वह पूरी तरह से तैयार हैं।
- नीरज मिश्रा, शिक्षक, विवेकानंद इंटर कालेज अल्मोड़ा
कोरोनाकाल से पठन-पाठन का पूरी तरीका ही बदल गया था। ऑनलाइन पढ़ाई नया माध्यम थी। फिर भी बच्चों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्हें सवालों के जवाब देने समेत परीक्षा के टिप्स दिए।
- जगदीश गुरुरानी, कूर्मांचल एकेडमी
बच्चों को परीक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार किया है। उन्हें समय प्रबंधन के साथ ही ये बताया गया है कि जो सवाल पहले आते हों उसी के उत्तर लिखें। इससे बच्चे पूरे के पूरे सवाल के जवाब दे सकते हैं।
- दीप चंद्र कांडपाल, विवेकानंद बालिका इंटर कालेज
बच्चों को मानसिक तौर पर मजबूत बना रहे शिक्षक और अभिभावक
बागेश्वर। कोरोना काल के बाद विद्यालयों में रौनक लौट गई है। ऑनलाइन माध्यम के सहारे शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चे अब विद्यालय की कक्षाओं में आकर पढ़ने लगे हैं। हालांकि करीब दो साल तक ऑफलाइन पढ़ाई से दूर रहने के कारण बच्चों को कुछ दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। कई बच्चों में शिक्षा को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं है। ऐसे में शिक्षक और अभिभावक बच्चों को शिक्षा के महत्व समझाकर उनकी हौसलाअफजाई कर रहे हैं। कंट्रीवाइड पब्लिक स्कूल कपकोट के शिक्षकों और अभिभावकों ने संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में अपने अनुभव बताए।
ऑनलाइन शिक्षा के कारण कई बच्चे पढ़ाई में पहले जैसी रुचि नहीं दिखा पा रहे थे। कुछ बच्चे मानसिक तौर पर भी ऑफलाइन कक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं थे। ऐसे में विद्यालय परिवार छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए मानसिक रूप से मजबूत बनाने के साथ कोरोना काल में प्रभावित हुई शिक्षा की भरपाई करने का प्रयास कर रहा है।
मोहिनी पांडेय, प्रधानाचार्य कंट्रीवाइड पब्लिक स्कूल कपकोट
कोविड काल में घर पर कैद रहने से कुछ बच्चे मानसिक परेशान हो गए, ऐसे में शिक्षा भी प्रभावित हुई। हालांकि अब स्कूल खुलने के बाद बच्चों को फिर से पुरानी रुटीन में ढालने का काम किया जा रहा है। शिक्षक बच्चों को सफल होने के लिए पढ़ाई का महत्व समझा रहे हैं। विद्यार्थियों की योग्यता और प्रतिभा को निखारने के लिए तनावमुक्त माहौल में शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।
गणेश कपकोटी, शिक्षक कंट्रीवाइड पब्लिक स्कूल कपकोट
कोविड काल में स्कूल बंद होने के बाद बच्चे ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, उस दौरान हमने घर पर उन्हें ऑफलाइन पढ़ाना भी जारी रखा। बच्चों के दिमाग में तनाव को हावी नहीं होने दिया। बच्चों से लगातार बातचीत करते रहे। विद्यालय खुलने के बाद रुटीन में कुछ बदलाव हुआ है, लेकिन इस माहौल में ढलने के लिए भी हम बच्चों की पूरी मदद कर रहे हैं।
राम चंद्र जोशी, अभिभावक, कपकोट
कोरोना काल में घर पर रहने के कारण बच्चों की शिक्षा पर काफी असर पड़ा। ऑनलाइन शिक्षा से कक्षा-कक्ष में होने वाली पढ़ाई की भरपाई नहीं हो सकती है। हालांकि हमने अपने स्तर से बच्चों को घर पर गाइड करते हुए ऑफलाइन लिखने और पढ़ने का अभ्यास कराया। स्कूल खुलने के बाद भी बच्चों को लगातार बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
महेश सिंह गढ़िया, अभिभावक कपकोट