अल्मोड़ा। एक तरफ देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है वहीं दूसरी तरफ स्वतंत्रता सेनानियों के गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी खीमानंद भट्ट, दुर्गा दत्त भट्ट के गांव गणाऊं, प्रताप सिंह बोरा का गांव दाड़िमी आजादी के 74 सालों बाद भी सड़क से नहीं जुड़ सका। मरीजों और प्रसव पीड़िताओं को ग्रामीण डोली से नजदीकी स्टेशन लेकर आते हैं। ग्रामीणों ने सड़क न बनने पर आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान किया है।
वर्ष 2014 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी खीमानंद भट्ट और दुर्गा दत्त भट्ट के गांव गणाऊं, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रताप सिंह बोरा के गांव दाड़िमी को सड़क से जोड़ने के लिए पांच किमी की जाख-गणाऊं-दाड़िमी सड़क स्वीकृत हुई थी। सड़क के पहले चरण के कार्यों के लिए भारत सरकार से वन भूमि की स्वीकृति भी मिल गई थी। वन विभाग ने 2016 में एनपीबी मद में 42 लाख 38 हजार रुपये जमा कर सड़क निर्माण में आने वाले पेड़ों का छपान भी किया।
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड ने डीपीआर बनाकर वित्तीय स्वीकृति के लिए लोक निर्माण सचिव को भेजी लेकिन वित्तीय स्वीकृति आज तक नहीं मिली। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क न होने से गांव के गंभीर मरीज और प्रसव पीड़िताओं को लोग डोली में नजदीकी स्टेशन लाते हैं। बरसात के दिनों में भारी मुसीबतों से जूझना पड़ता है।
सड़क बनने से इन गांवों को मिलेगी यातायात सुविधा
अल्मोड़ा। जाख-गणाऊं-दाड़िमी सड़क बनने के बाद गणाऊं के साथ ही तोक अनरगाड़ी, जाख, गौजानी, कुलमुड़ा, सीम, दाड़िमी, त्योनरा आदि गांवों की तीन हजार से अधिक की आबादी को यातायात सुविधा का लाभ मिलेगा।
-- क्या कहते हैं ग्रामीण
सड़क न होने से गांव के कई लोग पलायन कर रहे हैं। मरीजों को डोली में ले जाना पड़ता है। कई बार डोली उठाने को लोग भी नहीं मिलते हैं। जिससे भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
- नवीन चंद्र भट्ट, ग्राम प्रधान गणाऊं
आजादी के बाद भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गांवों में सड़क नहीं पहुंचना उनका अपमान है। क्रांतिकारियों के गांवों में आज बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। गांवों को सड़क से जोड़ा जाना चाहिए।
- देवकी नंदन जोशी, ग्रामोत्थान सेवा समिति के संरक्षक गणाऊं
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के गांव दाड़िमी आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है। अस्पताल काफी दूर है। इससे ग्रामीणों को परेशानी होती है। क्षेत्र, गांवों में स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा लगाई जानी चाहिए।
- गोकुल सिंह बोरा, प्रधान प्रतिनिधि दाड़िमी