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सिर्फ घोषणा बनकर रह गया रानीखेत जिला

Thu, 02 Jun 2016 12:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
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रानीखेत का नक्शा - फोटो : अमर उजाला
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। तो इस बार रानीखेत जिला अस्तित्व में आएगा या पांच साल पहले की तरह सिर्फ चुनावी घोषणा बनकर रह जाएगा? प्रदेश में आठ नए जिले बनाने की सुगबुगाहट के साथ ही लोगों के जेहन में यह बात कौंधने लगी है। 2011 में रानीखेत जिले की घोषणा के बावजूद यह जिला मूर्त रूप नहीं ले सका। इसीलिए लोगों के मन में तमाम तरह की आशंकाएं हैं। 
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पाली पछाऊं उपमंडल के विकास की अवधारणा को लेकर आजादी के बाद से ही रानीखेत जिले की मांग मुखर होती आई है। तमाम जनसंघर्षों के बावजूद यह मांग पूरी नहीं हुई है। जबकि जिला मुख्यालय बनाने के लिए यहां ब्रिटिश कालीन भवन, काफी संख्या में भूमि उपलब्ध है। 1869 में अंग्रेजों ने यहां छावनी बसाई, पाली से तहसील को यहां ले लाए। यहां आईसीएस, आईएएस स्तर के सहायक आयुक्त, संयुक्त मजिस्ट्रेट तैनात किए गए।

आजादी के बाद से ही अल्मोड़ा जिले को बांटकर अलग रानीखेत जिला बनाने की मांग उठी।  रानीखेत जिले के लिए आंदोलनों का क्रम 1960 के दशक से शुरू हुआ। 1985 बड़े आंदोलनों की शुरुआत हुई। 1987 में उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के अध्यक्ष वैंकट रमानी की समिति ने जिले की संस्तुति की और 1989 में आठवें वित्त आयोग ने वित्तीय मंजूरी प्रदान की। इसके बाद 1993-94 में भी आंदोलन किया गया। यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पहल पर रानीखेत में सीओ, एडीएम की नियुक्ति की गई। बाद में एडीएम को हटा दिया गया।
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2004, 2005 में फिर से लोग आंदोलनरत रहे। 2010 में अधिवक्ताओं के नेतृत्व में फिर से बड़ा जन आंदोलन हुआ। आठ महीने तक चले इस आंदोलन के बाद 2011 में तत्कालीन प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने रानीखेत जिले की घोषणा की, लेकिन गजट नोटिफिकेशन नहीं होने से लोगों की उम्मीदें धरी रह गईं।

2012 में विस चुनाव के बाद कांग्रेस सरकार अस्तित्व में आई, लेकिन सरकार ने समिति बैठाकर जिले के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब छह माह बाद विस चुनाव तय हैं। ऐसे में सरकार की तरफ से आठ नए जिले बनाने की सुगबुगाहट चल रही है, लेकिन लोगों के मन में यही आशंका है कि जिला अस्तित्व में आएगा या फिर चुनावी घोषणा मात्र बनकर रह जाएगा। 

रानीखेत। 2007 में प्रशासन ने राज्य सरकार को भेजे गए रानीखेत जिले के प्रस्ताव में छह ब्लॉक, पांच तहसीलें, 1309 राजस्व गांव, 59 न्याय पंचायतें, 120 पटवारी क्षेत्र शामिल किए गए हैं। 2001 की जनगणना के अनुसार प्रस्तावित जिले की जनसंख्या 3,40,456 और क्षेत्रफल 13735.740 हेक्टेयर है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद पांडे का कहना है कि रानीखेत में जिला मुख्यालय के लिए ब्रिटिश कालीन भवन उपलब्ध हैं। सरकार यहां कुछ अधिकारी भेजकर जिले का निर्माण कर सकती है। सिर्फ इच्छाशक्ति, ईमानदार सोच की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पाली पछाऊं उपमंडल में स्थित सल्ट, स्याल्दे, चौखुटिया के सुदूरवर्ती क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलेगा। 

रानीखेत। प्रस्तावित रानीखेत जिले में उद्यान निदेशालय, एसएसबी सीमांत मुख्यालय, पावर कारपोरेशन का सर्किल कार्यालय, तमाम विभागों के खंड स्तरीय कार्यालय, थाने, डिग्री कॉलेज, एक इंजीनियरिंग कॉलेज, दो पॉलीटेक्निक, एक निजी बीएड कॉलेज, उच्च तकनीकी संस्थान, रोडवेज डिपो, राजकीय अस्पताल, प्रधान डाकघर सहित केंद्र सरकार के कई कार्यालय और सैन्य संस्थान शामिल हैं।
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