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चाय पर चर्चा : दलबदल और आया राम गया राम की परिपाटी गलत

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त़ाड़ीखेत में चाय पर चुनावी चर्चा करते लोग। संवाद - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। प्रदेश की पांचवीं सरकार चुनने का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे ही राजनीतिक गतिविधियां भी जोर पकड़ने लगी हैं। चाय की दुकानों पर चल रही चुनावी चर्चा के बीच जहां अपना-अपना गणित लगाया जा रहा है, वहीं क्षेत्रीय समस्याओं को भी लोग बात करते नजर आ रहे हैं। ताड़ीखेत कस्बे में भी लोग चाय की चुस्की के साथ तमाम समीकरण भी साधने में जुटे हैं, हालांकि दलबदल और आया राम गया राम की राजनीति को वह लोग गलत मानते हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों में अब सुचिता जैसी बात देखने को नहीं मिल रही है। उनका कहना है कि स्थानीय चुनाव में क्षेत्रीय समस्याओं का निराकरण करने वाले प्रत्याशी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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रानीखेत विधानसभा क्षेत्र से इस बार भाजपा कांग्रेस के अलावा सपा, बसपा, आप और निर्दलीय सहित सात प्रत्याशी मैदान में हैं। अब हर गली, मोहल्लों और चाय की दुकानों पर लोग राजनीतिक चर्चाएं करते देखे जा रहा हैं। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में समस्याएं अपार हैं, ऐसी सरकार की वह लोग कामना कर रहे हैं जो बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य जैसी समस्याओं का प्राथमिकता के साथ निराकरण कर सके। इसी दौरान दलबदल और आया राम गया राम की बात भी छिड़ी। लोगों ने कहा कि इस तरह की परिपार्टी गलत है। एक दल से निकलकर दूसरे दल में लोग जा रहे हैं और दो घंटे बाद उसे टिकट मिल जा रहा है, ऐसे में दरी बिछाने वाले कार्यकर्ताओं की अहमियत ही क्या रही। वर्षों तक पार्टियों में रहकर कार्य करो और अंत में टिकट दल बदल करने वाले लोगों को मिल जाता है।
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