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अग्निपथ: किसी ने सराहा, किसी को रास नहीं आया

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उत्तराखंड पूर्व सैनिक परिषद के नगर संयोजक सेवानिवृत नायब सुबेदार सुरेंद्र लाल टम्टा। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। सेना में युवाओं की भर्ती के लिए केंद्र सरकार की ओर से पेश की गई अग्निपथ योजना को किसी ने सराहा है तो किसी को यह योजना रास नहीं आई। बेरोजगारी का दंश झेल रहे युवा इसे चार साल ही सही रोजगार और देश सेवा का जरिया मान रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार की इस योजना से जिले के उन हजारों बेरोजगारों को लाभ मिलेगा जो सेना में जाकर देश सेवा करना चाहते हैं। हालांकि संविदा पर तैनाती, पेंशन-ग्रेच्युटी न मिलने से युवा निराश हैं। कुछ पूर्व सैनिकों ने भी इस योजना का स्वागत किया है लेकिन कुछ ने कहा कि सैनिकों के बढ़ते वेतन और पेंशन खर्च को कम करने के नाम पर इसका क्रियान्वयन ठीक नहीं है।
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युवाओं की प्रतिक्रिया
चार साल सेना में भर्ती होकर युवा अपने सपनों को पूरा कर सकेंगे। इस योजना से मुझे और मुझ जैसे कई युवाओं को लाभ मिलेगा। इस योजना के लागू होने से पर्वतीय क्षेत्र के अधिकतर युवाओं को सेना में जाने का मौका मिल सकेगा। सरकार का कदम युवाओं के हित में है।
-रवि बिष्ट, अल्मोड़ा
इस योजना के शुरू होने से दोगुना उत्साह से तैयारी करेंगे। चार साल भी हम सेना में रहेंगे तो दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दे सकेंगे। युवाओं से सेना को भी एक नई मजबूती मिलेगी। इस योजना से युवाओं को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है।
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पवन बिष्ट, अल्मोड़ा
बेरोजगारी के दौर में सरकार बेहतरीन योजना लाई है। इसके तहत युवा को चार साल तक सेना को करीब से जानने का मौका मिलेगा। युवा काबिल हुआ तो वह आगे के लिए सिलेक्ट हो सकता है अगर उसका सिलेक्शन नहीं होता है तो भी उसे स्वरोजगार करने लायक रुपया चार साल की नौकरी में मिल जाएगा।
-दीपक कुमार बागेश्वर
इस योजना से बेरोजगारी कम करने के बजाय बढ़ा सकती है। चार साल की नौकरी के बाद जरूरी नहीं कि युवा घर आकर स्वरोजगार से जीवन ही सवारें। अगर वह भटक गया तो उसके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
-नमिश रावत बागेश्वर
पूर्व सैनिकों की बात
सैनिकों के सम्मान को पहुंचेगी ठेस: टम्टा
अल्मोड़ा। उत्तराखंड पूर्व सैनिक परिषद के नगर संयोजक सेवानिवृत्त नायब सूबेदार सुरेंद्र लाल टम्टा ने कहा कि अग्निपथ योजना को रक्षा बलों के खर्च को कम करने की दिशा में सरकार का शिगूफा है। पूर्व सैनिक इस योजना से नाखुश है। पूर्व सैनिकों ने सेना में लंबी सेवाएं दी है। वृद्धावस्था में पेंशन ही उनका एकमात्र सहारा होती है। सैनिकों के वेतन, पेंशन और अन्य भत्तों में कटौती होने से उनकी भावनाएं आहत होंगी। इससे सैनिकों के सम्मान को ठेस पहुंचेगा। सरकार को इस पर भी विचार करना चाहिए।
चार साल का समय सीखने में गुजर जाता है: जोशी
बागेश्वर। नदीगांव निवासी पूर्व सैनिक जगदीश चंद्र जोशी ने कहा सेना की भर्ती के लिए किसी प्रकार के प्रयोग नहीं किए जाने चाहिए। भारत देश विशाल है। ऐसे में चार साल के लिए युवाओं को सेना का प्रशिक्षण देकर घर भेजना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि सेना में चार साल का समय केवल सीखने में गुजर जाता है। जब तक सैनिक तैयार होगा तब तक तो सेवानिवृत्त हो जाएगा। इस तरह की योजना सेना में लागू नहीं की जानी चाहिए।
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