अल्मोड़ा। सर्वदलीय संघर्ष समिति से जुड़े लोगों ने जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने इस मामले में डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
इधर आम लोगों का कहना है कि डीडीए के कारण उनपर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार को शीघ्रातिशीघ्र डीडीए को समाप्त कर प्रदेशवासियों को राहत देनी चाहिए।
सीएम को भेजे ज्ञापन में सर्वदलीय संघर्ष समिति से जुड़े लोगों ने कहा कि वर्तमान में शासन ने डीडीए को समाप्त न कर स्थगित रखा है। आदेश में कहा गया कि जहां पूर्व में प्राधिकरण बने हुए हैं वहां डीडीए द्वारा ही मानचित्र स्वीकृत किए जाएंगे।
इससे लगता है कि सरकार प्राधिकरणों को समाप्त नहीं करना चाहती है। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा प्राचीन नगर है। डीडीए के नियम हर स्थान की भौगोलिक परिस्थिति, धरातलीय बनावट और जलवायु के अनुसार लागू होते हैं लेकिन यहां की भौगोलिक, धरातलीय स्थिति मैदानी क्षेत्रों से एकदम अलग है।
इस कारण पर्वतीय क्षेत्रों में डीडीए को जबरदस्ती थोपा जाना पहाड़ के लोगों के साथ धोखा है। उन्हाेंने डीडीए को समाप्त करने का शासनादेश निर्गत करने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में संयोजक प्रकाश चंद्र जोशी, पूर्व विधायक मनोज तिवारी, राजीव कर्नाटक, हर्ष कनवाल, पूरन तिवारी, दीपांशु पांडे आदि थे।
नवंबर 2017 में प्राधिकरण लागू करना प्रदेश सरकार का तुगलकी फरमान था। 90 प्रतिशत तक बस चुके अल्मोड़ा शहर में प्राधिकरण लागू करने का कोई औचित्य नहीं है। प्राधिकरण के नियम यहां की कठिन भौगोलिक स्थितियों के ठीक विपरीत हैं। - राजीव कर्नाटक, अल्मोड़ा
प्राधिकरण लागू करना न्यायोचित नहीं है। इसके कारण आज पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन बढ़ रहा है। प्राधिकरण का शुल्क भी अत्यधिक होने के कारण लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। प्रदेश सरकार को प्राधिकरण समाप्त कर जनता को राहत देनी चाहिए। - वैभव पांडे, अल्मोड़ा
प्राधिकरण के लागू होने से जनता को अपने भवन निर्माण में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को पर्वतीय क्षेत्रों से प्राधिकरण समाप्त कर यहां मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखकर रप्लान तैयार करना चाहिए। प्राधिकरण से जनता परेशान है। - दीपांशु पांडेय, अल्मोड़ा
बिना कुमाऊं क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का आकलन किए सरकार ने अव्यवहारिक तरीके से जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण लागू कर दिया। इससे जनता को भवन निर्माण में भारी असुविधा हो रही है। जनता पर प्राधिकरण के भारी शुल्क से आर्थिक दबाव पड़ रहा है। - लता तिवारी, अल्मोड़ा