फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jageshwar Dham: जागेश्वर धाम में हजारों वर्ष पुरानी लिपि के रहस्य से उठा पर्दा, जानिए क्या है लिखा

Mon, 27 Nov 2023 02:09 PM IST
हीरा मेहरा दीपक चंद्र कापड़ी, संवाद

सार

अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम के मंदिरों की दीवारों और शिलालेखों पर उत्कीर्ण करीब एक हजार वर्ष से अधिक पुरानी लिपि के रहस्य से पर्दा उठ गया है। इन शिलालेखों पर देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के नाम के अलावा मंदिरों में किए गए कार्यों का विवरण उत्कीर्ण है।
विज्ञापन
जागेश्वर धाम - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जागेश्वर धाम के मंदिरों की दीवारों और शिलालेखों पर उत्कीर्ण करीब एक हजार वर्ष से अधिक पुरानी लिपि के रहस्य से पर्दा उठ गया है। इन शिलालेखों पर देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के नाम और उनकी ओर से इन मंदिरों में किए गए कार्यों का विवरण उत्कीर्ण है।

विज्ञापन


जागेश्वर धाम में महामृत्युंजय सहित कुछ अन्य मंदिरों की दीवारों पर प्राचीन लिपि उत्कीर्ण है। मृत्युंजय मंदिर के मंडप में तीन प्राचीन शिलालेख भी थे। इन पर अंकित लिपि के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं था। इसे देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) देहरादून मंडल ने पिछले साल ही एपिग्राफी शाखा को पत्र भेजा था। अब एपिग्राफी शाखा ने पत्र के माध्यम से जानकारी दी है कि इन लिपि का अनुवाद 1960 में देश के प्रसिद्ध पुरालेख विशेषज्ञ डॉ. डीसी सरकार कर चुके हैं। 

एएसआई ने कुछ समय पूर्व जागेश्वर मंदिर के शिलालेखों के अनुवाद को लेकर एपिग्राफी शाखा को पत्र भेजा था। वहां से जानकारी मिली है कि इसका अनुवाद 1960 के दशक में डॉ. डीसी सरकार कर चुके हैं। शिलालेखों पर और भी शोध की जरूरत है। उसके बाद ही इनका अनुवाद लोगों के लिए डिस्प्ले किया जाएगा। -केबी शर्मा, सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद, जागेश्वर।
विज्ञापन


अल्मोड़ा मंडप की 13वीं सदी में हुई थी मरम्मत
शिलालेखों में उत्कीर्ण लिपि के अनुवाद से स्पष्ट है कि महामृत्युंजय मंदिर के मंडप की 13वीं सदी में मरम्मत हुई थी। एक शिलालेख में लिखा है कि मंडप मरम्मत का कार्य श्री कुमाद्रि में तुलाराम की पत्नी ने कराया था। मरम्मत कार्य नारायण के पुत्र कृष्णदास के छोटे भाई किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें