अल्मोड़ा। पांच साल से फरार चल रहे 20 हजार रुपये के इनामी माओवादी भास्कर पांडे को अल्मोड़ा पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। नानीसार आंदोलन से सुर्खियों में आया भास्कर पांडे माओवादी खीम सिंह बोरा के बाद कुमाऊं में माओवाद का सबसे मजबूत स्तंभ था। पांच सालों से तीन जिलों की एसटीएफ, इंटेलीजेंस सहित अन्य खुफिया एजेंसियां और पुलिस भास्कर की तलाश कर रहीं थीं।
2016 में अल्मोड़ा जिले में हुए नानीसार आंदोलन से भास्कर पांडे का नाम सुर्खियों में आया था। उसके भूमिगत होने पर पुलिस प्रशासन ने उस पर ढाई हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। 2017 में माओवादी देवेंद्र सिंह चम्याल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने भास्कर पर इनाम बढ़ाकर पांच हजार और उसके बाद 20 हजार तक कर दिया लेकिन इसके बाद भी उसे पकड़ा नहीं जा सका। इस बार भी चुनाव के समय अल्मोड़ा जिले में माओवादियों की सक्रियता बढ़ने के अंदेशे से अल्मोड़ा एसएसपी पंकज भट्ट ने अपनी टीम को भास्कर पांडे की सुरागकशी में लगाया था। पंकज भट्ट के निर्देशन में पुलिस टीम करीब 15 दिनों से उसकी धरपकड़ के लिए जाल बिछा रही थी। सोमवार को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने भास्कर पांडे को अल्मोड़ा क्षेत्र से ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुुुसार भास्कर के पास से कुछ माओवादी परचे और माओवादी आंदोलनों से जुड़ी पत्रिकाएं बरामद हुई हैं। फिलहाल पुलिस उससेे पूछताछ में जुटी है। माना जा रहा है कि भास्कर से पूछताछ के बाद पुलिस कुमाऊं में माओवादी गतिविधियों को लेकर कई बड़े राज खोल सकती है।
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20 हजार के इनामी माओवादी भास्कर पांडे को एसटीएफ और अल्मोड़ा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर अल्मोड़ा क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। भास्कर पांडे लंबे समय से फरार चल रहा था। अल्मोड़ा पुलिस और एसटीएफ की यह एक बड़ी उपलब्धि है। कुमाऊं में माओवाद की अंतिम कील को उन्होंने उखाड़ा है। एसटीएफ और अल्मोड़ा पुलिस को इसके लिए सम्मानित किया जाएगा। पूरे ऑपरेशन में सूचना देकर अहम भागीदारी निभाने वाले को भी मेडल देकर पुलिस सम्मानित करेगी।
- अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखंड।