स्याल्दे बिखोती मेले के दूसरे दिन आयोजित बटपुजै मेले का शुभारंभ विधायक मदन बिष्ट, पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी और कंचन रावत ने संयुक्त रूप से किया। बिष्ट ने कहा यह ऐतिहासिक मेला हमारी संस्कृति को सहेजने का काम कर रहा है। त्रिपाठी ने कहा कि मेला हमारी संस्कृति का वाहक है। इसे भव्यता से मनाने का हमेशा प्रयास रहेगा। इस दौरान रणां, कुई, कोटीला, बूंगा, बेढूली, किरौला फाट, सलना, बसेरा, असगोली, गुपटली और वलना के लोग 11 जोड़ी नंगाड़े और निशानों के जोशीले अंदाज में ओड़ा स्थल तक पहुंचे।
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुन के बीच वीर रस का प्रतीक संरकार खेलते और हुड़के, चिमटे के साथ झोड़ा, भगनौला गायन करते हुए लोगों ने ओड़ा भेटने की रस्म निभाई। इस परंपरा का गवाह बनने बढ़ी संख्या में लोग पहुंचे। इस मौके पर मेला समिति उपाध्यक्ष हेम रावत, कंचन साह, हेम रावत, जगत रौतेला, गिरीश चौधरी, नारायण अधिकारी, प्रताप बिष्ट सहित कई लोग मौजूद रहे। संवाद
भगनौल का भी गायन किया
द्वाराहाट। बिखोती मेले में बूंगा के युवाओं ने विभांडेश्वर मंदिर परिसर में डांडिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। वहीं महिलाओं ने झोड़ा, चांचरी, भगनौल का गायन कर संस्कृति के रंग बिखेरे। इन लोकगीतों का आनंद लेने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। संवाद
वटपुजै मेले पर हुड़के की थाप पर लोगों को किया जागरूक
द्वाराहाट। वटपुजै मेले में बाल प्रहरी संपादक उदय किरौला, लोक गायक नंद लाल, गोपाल सिंह की टीम ने हुड़के की थाप पर अपनी रचनाओं से प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों को बयां किया। कलाकारों ने घर घरों में नल लागीं गीं, पाणीं की हैरै पट्टा रचना से जल संकट को उजागर किया। गुणीं बांनरा जै लागनी खेती पाति चौपट्टा के जरिए बंदरों के बढ़ते उत्पात, खेती को हो रहे नुकसान को लेकर किसानों की व्यथा सुनाई। टीम में केपीएस अधिकारी, लक्ष्मी त्रिपाठी, डॉ. राम सिंह राणा, अनिल चौधरी, सीपी जोशी आदि शामिल रहे।