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जिले में इंजीनियरिंग, मेडिकल समेत अकादमिक शिक्षण संस्थानों की भरमार

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Higher Education in Almora
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अल्मोड़ा में शैक्षिक संस्थानों की कमी नहीं फिर भी विदेश की चाह
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अल्मोड़ा। जिले में उच्च, तकनीकी, व्यावसायिक शिक्षण संस्थान होने के बावजूद बेहतर कॅरिअर की तलाश में उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राएं अब भी विदेश और अन्य प्रदेशों का रुख कर रहे हैं।
नगर में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय के तहत बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएड, एमएड, पत्रकारिता आदि प्रोफेशनल, एलएलबी की पढ़ाई होती है। विश्वविद्यालय में जिलेभर से छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए आते हैं। होटल लाइन में कॅरिअर बनाने वाले छात्रों के लिए शहर में राजकीय होटल मैनेजमेंट संस्थान है। इस संस्थान से पढ़कर निकले कई छात्र-छात्राएं होटल खोल चुके हैं। जिले में मेडिकल शिक्षा भी बेहतर है। जिला मुख्यालय में सरकारी नर्सिंग कॉलेज के साथ ही अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज हैं। हाल में ही मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। जिले के द्वाराहाट में विपिन चंद्र त्रिपाठी कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज है। यहां बाहरी स्थानों से भी छात्र इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने आते हैं। संस्थान कैंपस प्लेसमेंट के जरिये प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराता है। जिला शिक्षा, शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य डॉ. राजेंद्र सिंह का मानना है कि विदेशों में शिक्षण शुल्क यहां की तुलना कम है। मेडिकल की पढ़ाई भी यहां की तुलना वहां कम शुल्क में हो जाती है। कई बार बच्चे प्रवेश परीक्षा में असफल हो जाते हैं। इससे उन्हें यहां के शिक्षण संस्थानों में दाखिला नहीं मिलता है।
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बागेश्वर में मेडिकल और व्यावसायिक शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं
बागेश्वर। जिले में इंटर के बाद बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी, बीएड ही विकल्प हैं। मेडिकल और व्यावसायिक शिक्षा की भी कोई व्यवस्था नहीं है। पीजी कॉलेज बागेश्वर में ही एमएससी की पढ़ाई होती है।
जिला मुख्यालय में स्थापित पीजी कॉलेज में व्यावसायिक पाठ्यक्रम के नाम पर बीएड और कार्यालय प्रबंध विषय की पढ़ाई होती है। अन्य कोई भी व्यावसायिक विषय जिले के सबसे पुराने डिग्री कॉलेज में संचालित नहीं हो सके। कपकोट महाविद्यालय में एमए की कक्षाओं का संचालन होता है, लेकिन केवल संस्कृत, गृहविज्ञान विषय पढ़ाए जाते हैं। दुगनाकुरी और गरुड़ महाविद्यालय में केवल स्नातक स्तर की पढ़ाई होती है।
बागेश्वर जिले के लिए मेडिकल शिक्षा तो दूर की कौड़ी है। यहां के उच्च शिक्षा संस्थानों में एमबीए, बीबीए, एचएम जैसे व्यावसायिक विषयों की पढ़ाई की तक सुविधा नहीं है। व्यावसायिक शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को बड़े शहरों में जाना पड़ता है या सुविधायुक्त जिलों में बागेश्वर के बच्चे तकनीकी शिक्षा हासिल करते हैं। कांडा का पॉलीटेक्निक कॉलेज और आईटीआई ट्रेडों की कमी से जूझ रहा है।
पिथौरागढ़ जिले में एक इंजीनियरिंग कॉलेज और पांच पॉलीटेक्निक संस्थानों सहित आठ महाविद्यालय
पिथौरागढ़। चीन और नेपाल सीमा से लगे पिथौरागढ़ जिले में उच्च शिक्षा के नाम पर खोले गए एक इंजीनियरिंग कॉलेज और पांच पॉलीटेक्निक संस्थानों सहित आठ महाविद्यालयों से डिग्रियां तो हासिल हो जाती हैं लेकिन जिले में रोजगार के कोई संसाधन नहीं हैं। ऐसे में हाथों में डिग्रियां लेकर नौकरी के लिए युवाओं को शहरों की खाक छाननी पड़ती है। इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक के छात्रों को भी रोजगार के लिए बाहर ही जाना पड़ता है।
जिले में वर्तमान में सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाने के इच्छुक युवाओं के लिए यह कॉलेज एक अच्छे विकल्प के रूप में सामने आया है। हर साल यहां से लगभग 200 छात्र-छात्राएं डिग्री लेकर निकलते हैं। इसके अलावा मूनाकोट, गणाई गंगोली, डीडीहाट, कनालीछीना और बांस में पॉलीटेक्निक कालेज हैं। इन कॉलेजों से भी छात्र-छात्राएं तकनीकी शिक्षा की डिग्री प्राप्त करते हैं। हर साल औसतन 150 छात्र-छात्राएं संस्थानों से पास आउट होते हैं। तकनीकी डिग्री होने से कई विद्यार्थियों को रोजगार मिल जाता है लेकिन स्थानीय स्तर पर रोजगार के संसाधन नहीं होने से नौकरी के लिए शहरों की ओर रुख करना पड़ता है।
उच्च शिक्षा की बात करें तो पीजी कालेज पिथौरागढ़, नारायणनगर, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, गणाई गंगोली, बलुवाकोट, मुनस्यारी, मुवानी महाविद्यालय हैं। इन महाविद्यालयों से हर साल लगभग सात से आठ हजार छात्र-छात्राएं हाथों में डिग्रियां लेकर बाहर निकलते हैं। यह ऐसे छात्र-छात्राएं होते हैं जिन्हें शिक्षा सहित अन्य तमाम क्षेत्रों में कॅरियर बनाने के लिए फिर से प्रतियोगिता परीक्षाओं का संघर्ष करना होता है।
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बुनियादी सुविधाओं का अभाव
पिथौरागढ़। उच्च शिक्षा के नाम पर छात्रों को प्रवेश देकर भले ही डिग्रियां दे दी जा रही हों लेकिन इन तमाम संस्थानों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। पिथौरागढ़ का सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज को अभी भी अपना भवन नहीं मिल सका है। करोड़ों खर्च करने के बाद भी मड़धूरा में भवन आधा अधूरा पड़ा है। यही हाल यहां के महाविद्यालयों का भी है। कई महाविद्यालय अभी भी टिन शेडों या फिर पुराने इंटर कॉलेजों के भवनों में चल रहे हैं। संवाद
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