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वन विभाग ने अप्रशिक्षित कर्मचारी बंदर पकड़ने में लगाए

Mon, 04 Apr 2016 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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बंदर पकड़ने वाले - फोटो : अमर उजाला
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बंदरों द्वारा पहुंचाए जा रहे नुकसान के मामले को हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान में लेने के बाद वन विभाग ने शहर में बंदर पकड़ने को अभियान रविवार को शुरू तो कर दिया है, लेकिन जो स्थिति है उसमें उत्पाती बंदरों से निजात मिलने की उम्मीद नहीं है। विभाग ने अप्रशिक्षित कर्मचारी बंदर पकड़ने के काम में लगाए हैं।
एकमात्र पेटी लेकर काम को अंजाम देने में जुटे कर्मियों की सफलता भोजन के लालच में स्वयं ही भीतर घुस आने वाले बंदरों पर निर्भर है। 
नगर में बंदर पकड़ने के लिए वन विभाग ने पूर्व में भी अभियान चलाया था।
तब मथुरा से बंदरों को पकड़ने वाले पेशेवरों को काम पर लगाया था। यह पेशेवर टीम बड़ा सा जाल फैलाकर उसमें चने, मूंगफली, केले आदि रख देते थे। जैसे ही बंदर भोजन लेने जाल में आते डोरी खींच कर जाल बंद कर दिया जाता। इस तरीके से प्रतिदिन दर्जनों बंदर पकड़े जाते थे। बंदरों के मामले को हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लेने पर वन विभाग ने अभियान तो शुरू कर दिया है, लेकिन यह कारगर होता नहीं दिखाई दे रहा है। 
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विभाग ने करीब आधा दर्जन विभागीय कार्मिकों को बंदर पकड़ने के काम पर लगाया है।
जहां बंदरों की मौजूदगी दिखाई देती है, यह टीम लकड़ी की एक पेटी लेकर वहां पहुंचते हैं। पेटी के ऊपर ढक्कन वाले भाग में अंदर चने, केले आदि रख रहे हैं। खाने के लिए बंदर यदि पेटी के अंदर घुसता है तो रस्सी के सहारे ढक्कन बंद कर बंदर को पकड़ लिया जाता है। इक्का-दुक्का बंदर पकड़ने हों तो यह तकनीक कामयाब हो सकती है, लेकिन नगर के मोहल्लों में सैकड़ों बंदर को इस तरह पकड़ा जाना संभव ही नहीं है। बंदर टोली का एक सदस्य धोखे से पेटी में फंस जाता है तो इसके बाद दल के अन्य सदस्य सतर्क हो जा रहे हैं और फिर वह पेटी के आसपास फटकते तक नहीं हैं। लोगों का कहना है कि वन विभाग का अभियान लोगों को राहत देने को कम और न्यायालय की फटकार से बचने की जुगत अधिक दिखाई दे रही है।
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पहले दिन पकड़े गए चार बंदर 
बंदर पकड़ने को वन विभाग ने पहले दिन सिटोली औैर रानीधारा क्षेत्र में अभियान चलाया। शाम तक चार बंदर पकड़ में आए। वन कर्मी पकड़े गए बंदरों को पिंजरे में डालकर एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर ले गए। रेंजर मोहन राम ने बताया कि बंदरों को पकड़ने के लिए पेशेवर टीम को काम पर लगाने में काफी बजट खर्च होता है। जल्द ही विभागीय कर्मचारियों की कई अन्य टीमों को बंदर पकड़ने के काम में लगाया जाएगा। 

 
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