दूनागिरि मंदिर ट्रस्ट की वैद्यता पर सवाल उठाते हुए मंदिर सेवार्थ सर्वदलीय संघर्ष समिति के तत्वावधान में स्थानीय लोगों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। कहा कि प्रशासन द्वारा ट्रस्ट को असंवैधानिक ठहराए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, राजनैतिक संरक्षण के चलते असंवैधानिक ट्रस्टियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।
मंदिर की व्यवस्थाएं पूर्ववत मंदिर समिति को सौंपने की मांग पूरी नहीं होने पर वृहद आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई। यहां चौराहे पर आयोजित धरने में वक्ताओं ने कहा कि दूनागिरि मंदिर सुधार समिति के नाम से 2002 तक संचालित थी। 2003 में विकास कार्यों की लालसा को लेकर ट्रस्ट बनाने की सहमति बनी, लेकिन स्व. नारायण सिंह रौतेला ने ट्रस्ट के बायलॉज को व्यक्तिगत बनवा दिए, सदस्यों को बायलॉज दिखाए तक नहीं। इधर आरटीआई में खुलासा होने के बाद सदस्यों को पता चला तो आक्रोश भड़क उठा। शिकायत के बाद एसडीएम ने इसी साल 20 अप्रैल को ट्रस्ट को असंवैधानिक करार दिया था।
छह मई को जिलाधिकारी ने आम बैठक की, जिसमें व्यवस्था मंदिर समिति को सौंपे जाने पर सहमति बनी। जिलाधिकारी ने तीन दिन के अंदर निर्णय देने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अलबत्ता ट्रस्टियों ने मंदिर समिति के सचिव, कोषाध्यक्ष और व्यवस्थापक को ही हटा दिया। वहीं बैंकों में आहरण वितरण पर रोक लगवा दी। व्यवस्थाओं पर व्यवधान हो गया। कहा कि असंवैैधानिक ट्रस्टियों द्वारा मंदिर के कार्यों में व्यवधान डाला जा रहा है। कहा कि राजनैतिक दबाव के चलते प्रशासन निर्णय नहीं ले पा रहा है। सभा में मंदिर समिति के सचिव जगदीश उपाध्याय, डॉ. डीपी चौधरी, महेश नेगी, विनोद भट्ट, पीतांबर भट्ट, धन सिंह बिष्ट, शिव सिंह बिष्ट मौजूद थे।