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नौजवानों को शहीद भगत सिंह के वैचारिक दर्शन को समझना होगा: बल्ली सिंह चीमा

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शहीद दिवस की संगोष्ठी में मंचासीन जनकवि बल्ली सिंह चीमा व छात्र नेता। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के बलिदान दिवस पर उत्तराखंड छात्र संगठन (उछास) ने राजकीय संग्रहालय में एक विचार, काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। जनकवि बल्ली सिंह चीमा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। चीमा ने कहा भगत सिंह और उनके साथियों ने जिस शोषण मुक्त व एकसमान समाज के निर्माण के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया उसको पाना अभी शेष है। इसके लिए नौजवानों को भगत सिंह के वैचारिक दर्शन को समझने की जरूरत होगी। उछास की संयोजक दीक्षा सुयाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
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कार्यक्रम में चीमा ने अपने चर्चित जनगीत ले मशालें चल पड़े हैं के साथ ही जन आंदोलनों को प्रेरित करने वाली अनेक रचनाओं का पाठ किया। यहां उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि समाज में गैरबराबरी को समाप्त करने व शोषण मुक्त समाज की रचना के लिए इतिहास में तमाम क्रांतिकारियों ने भगत सिंह से पहले और उनके बाद भी संघर्ष जारी रखा है। भगत सिंह एक व्यक्ति नहीं बल्कि परिवर्तन की धारा के प्रतीक हैं। उनकी जितनी जरूरत तब थी उससे भी अधिक जरूरत आज है। वकील रमाशंकर नैनवाल ने कहा कि एक बेहतर समाज की लड़ाई के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है। संस्कृतिकर्मी नवीन बिष्ट ने कहा कि आजादी के नाम पर जन भावनाओं से खिलवाड़ हुआ और सरकारें जनता की नहीं बल्कि पूंजीपतियों की पक्षधरता कर रही हैं। आकाशवाणी अल्मोड़ा के निर्देशक प्रतुल जोशी ने कहा कि छोटी सी उम्र में भगत सिंह के संघर्ष, विचारों, सूझबूझ ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गंभीर क्रांतिकारी के रूप में स्थापित किया है। संचालन उछास की भारती पांडे ने किया। वहां पर बलवंत नगरकोटी, प्रियांशु बनौला, कृष्णा आर्या, निशांत कुमार, यशपाल आर्या, अंजू, दिव्यांशु जोशी, शिप्रा मेहता आदि थीं।
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