गगास में निर्माणाधीन बैराज। संवाद
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। छानागोलू स्थित गगास नदी में निर्माणाधीन बैराज सरकारी विकास का आईना है। तीन साल बाद भी सिर्फ 30 प्रतिशत कार्य हुआ है जबकि 2021 में ही निर्माण कार्य पूरा हो जाना चाहिए था। पंचायत प्रतिनिधियों ने बैराज निर्माण में हो रही लेटलतीफी पर विभाग को भी घेरा है। उनका आरोप है कि बैराज अवैध खनन का अड्डा बनकर रह गया है। 26 मई को द्वाराहाट में प्रस्तावित बीडीसी बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। द्वाराहाट और रानीखेत विधानसभा के गांवों को पेयजल, सिंचाई व्यवस्था तथा रोजगार दिलाने के उद्देश्य से बैराज को स्वीकृति मिली थी।
गगास नदी में लगभग 32 करोड़ की लागत से बहुउद्देशीय बैराज को स्वीकृति मिली। सात मार्च 2019 को तत्कालीन केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा और विधायक महेश नेगी ने इसका शिलान्यास किया। बैराज को मार्च 2021 तक बनकर तैयार हो जाना था और सिंचाई विभाग को बैराज हस्तांतरित हो जाना चाहिए था। बैराज बनने से रानीखेत, द्वाराहाट विधानसभा क्षेत्रों की जहां पेयजल समस्या दूर होती, वहीं सिंचाई के लिए भी लोगों को परेशान नहीं होना पड़ता। निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि तीन साल बाद भी कुल 30 फीसदी काम हुआ है। कहा कि इसका जिम्मेदार कौन होगा। सिचाई विभाग की लेटलतीफी के कारण ही ठेकेदार निरंकुश हो गए। कहा कि बीडीसी बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि विभाग के खिलाफ जनहित याचिका के लिए भी सभी से एकजुट होने की अपील की है।
‘बैराज के नाम पर खनन का खुला खेल’
द्वाराहाट। प्रधान संगठन के महासचिव प्रमोद जोशी ने आरोप लगाया है कि बैराज निर्माण के नाम पर खुलकर खनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की बात करने वाले विभाग भी इस पर मौन साधे हुए हैं। गांव को सड़क से तो नहीं जोड़ा गया लेकिन बैराज के लिए दो दो सड़कें बना दी गई। उन्होंने इसे सरकारी धन का दुरुपयोग करार दिया। कहा कि सड़क काटने वाला लघु सिंचाई विभाग को सड़क काटने का अधिकार कैसे मिल गया।
-विभाग का खनन से कोई मतलब नहीं है। बैराज निर्माण कार्यों की प्रगति धीमी है, इसलिए बार बार ठेकेदार को नोटिस दिए जा रहे हैं। मुख्य अभियंता की ओर से ठेकेदार का बांड निरस्त करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। ठेकेदार को अनुभव नहीं है। कार्यों की प्रगति धीमी है और ठेकेदार पूर्व में कार्यालय में हंगामा मचा चुका है। कार्यों की धीमी प्रगति के चलते मेरा स्वयं का स्वास्थ्य खराब है, मैंने अपने स्थानांतरण की भी अपील की है।-चंडी प्रसाद भट्ट, ईई, सिंचाई खंड चिलियानौला।