द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन के दौरान जब स्कूल बंद थे। ऐसे में क्षेत्र के कई शिक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए शिक्षण कार्य जारी रखा। व्हाट्सएप ग्रुप बनाए और पाठ्यसामग्री के वीडियो बनाकर बच्चों को उपलब्ध कराए। मोहल्ला पाठशाला खोलकर नौनिहालों को पढ़ाई से जोड़े रखा। कुछ शिक्षकों ने मेरा आंगन-मेरा स्कूल अभियान के तहत बच्चों को पढ़ाने का प्रयास किया। इस कार्य में कठिनाई भी आई। हर घर में अभिभावक के पास स्मार्टफोन नहीं होने की दिक्कत थी। मोहल्ला पाठशाला के तहत ऐसे बच्चों को पढ़ाया गया। मोबाइल नेटवर्क में इंटरनेट की धीमी गति की समस्या प्रमुख रही। लंबे लर्निंग गैप के कारण बच्चों में रुचि की कमी भी सुधारी गई। वर्कशीट को लगातार रुचिकर बनाए रखने की समस्या भी आड़े आई। हालांकि बाद में सबकुछ सामान्य हो गया था।
-कोरोनाकाल शिक्षा को एक चुनौती के रूप में लेकर आया। घर पर रहकर ही सभी बच्चों से आनलाइन माध्यम से जुड़ना बड़ी समस्या थी। सभी बच्चों के अभिभावकों के पास स्मार्टफोन नही थे। आनलाइन कक्षाएं संचालित करने के साथ-साथ अपना यूट्यूब चैनल बनाया। इसमें बच्चों की जरूरत के अनुसार वीडियो अपलोड किए गए। इससे अन्य बच्चे भी लाभान्वित हुए। ऑनलाइन न जुड़ पाने वाले बच्चों को मोहल्ला पाठशाला के माध्यम से शिक्षित किया गया।- दीपक चंद्र पांडेय राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल रियूनी।
-बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना एक चुनौती थी। इसे स्वीकार करते हुए मेरे द्वारा मेरा आंगन मेरा स्कूल कार्यक्रम लॉकडाउन के दौरान चलाया गया। विद्यालय प्रबंधन समिति ने भी इसमें सहयोग किया। व्हाट्सएप के माध्यम से वीडियो बनाकर भी बच्चों को भेजे गए। फोनकाल के माध्यम से भी बच्चों से लगातार जुड़ा रहा। -मनोज कुमार पंत राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नौलाकोट।
-मेरे स्कूल में मोबाइल नेटवर्क की बहुत समस्या है। ऐसे में आनलाइन शिक्षण कार्य बहुत ही मुश्किल हो रहा था। बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए लगातार वर्कशीट बनाई गई। मैं इन्हें प्रत्येक सप्ताह बच्चों को देने जाती थीं और लेकर भी आती थीं। इस प्रकार मुश्किल समय में भी बच्चे अपनी कक्षा के अनुरूप शिक्षण कार्यों से जुड़े रहे। एसएमसी का सहयोग इन कठिन दिनों में लगातार मिलता रहा। मोहल्ला पाठशाला भी बच्चों के शिक्षण कार्य में बहुत कारगर रही।- नविता वर्मा राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नवीन रियूनी।
-कोविड काल ने सबसे ज्यादा नुकसान छोटे बच्चों का किया। लॉकडाउन में आनलाइन शिक्षण कार्य करवाने के साथ ही वर्कशीट भी बच्चों तक पहुंचाई गई। बच्चों के घर जाकर पीएमई विद्या कार्यक्रम और उनके टीवी चैनलों के बारे में भी बच्चों और अभिभावकों को बताकर जागरूक किया। स्वयंप्रभा कार्यक्रम से बच्चों को बहुत लाभ हुआ।-कमल किशोर आर्या राजकीय प्राथमिक विद्यालय, ढूंगी