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बिखोती मेले में 12 जोड़े नगाड़े निशानों के साथ ग्रामीणों ने की शिरकत

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स्याल्दे बिखोती मेले के दौरान श्रंकार नृत्य प्रस्तुत करते कलाकार। संवाद - फोटो : RANIKHET
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। पाली पछांऊ के ऐतिहासिक स्याल्दे बिखोती मेले के दूसरे दिन बट पुजै मेले में नौज्यूला धड़े ने नौ जोड़ी नगाड़े निशानों के साथ ओड़ा भेंटने की रस्म अदा की। नंगाड़े निशानों के साथ जोशो खरोस में ग्रामीणों ने ओड़ा भेंटा।
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64 वर्षों बाद 25 किलोमीटर दूर से पहुंचे ईड़ा, जमीनीवार-जमीनीपार के अलावा विद्यापुर, छतीना, बमनपुरी, सलालखोला, ध्याड़ी, हाट और कौंला के लोगों का हुजूम तमाम पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ वीर रस का प्रतीक श्रंकार नृत्य करते हुए हुड़के की थापा के साथ पहुंचे। इस दौरान झोड़े भगनौल गाते हुए ओड़ा भेटने की रस्म अदा की गई।
म्यर मन कैं लै रौ टकाटक... सहित पुराने ही झोड़ों का गायन चल रहा था। इस दौरान एसडीएम जयवर्धन शर्मा, मेला समिति के अध्यक्ष मुकेश साह, हेम रावत आदि मौजूद रहे। वहीं, घटगाड़ से युवतियों और महिलाओं का एक दल मुख्य चौराहे तक झोड़ा गाते हुए पहुंचा। ओड़ा भेंटने की रस्म के बाद बारिश की बूंदाबांदी से कुछ देर अव्यवस्था फैली। मेले का संचालन नारायण रावत ने किया।
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केपीएस के बच्चों ने पेश किए कार्यक्रम
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। कुमाऊं पब्लिक स्कूल में बिखौती के अवसर पर बच्चों ने रंगारग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। प्रधानाचार्य उमा अधिकारी और त्रिभुवन तिवारी ने विद्यार्थियों को स्याल्दे बिखोती मेले के बारे में जानकारी दी। वहां पर स्कूल की चेयरमैन रेखा चौहान, निदेशक पीएस राना और तमाम शिक्षक मौजूद रहे।
बाल प्रहरी पत्रिका की काव्य गोष्ठी
द्वाराहाट। स्याल्दे बिखोती मेले के उपलक्ष्य में बालप्रहरी पत्रिका तथा बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा की तरफ से यहां एमडी तिवारी इंटरमीडिएट में काव्य गोष्ठी हुई। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रमेश पंत ने की। मुख्य अतिथि पूर्व खंड शिक्षाधिकारी ओपी हर्बोला ने कहा कि युवा पीढ़ी संस्कृति को भूलते जा रही हैं। साहित्यकार पंत ने अपनी कविता में कहा कि अहम मौकों पर झुकाए सिर मिले, आदमी की शक्ल में पत्थर मिले, केपीएस अधिकारी ने कहा बच्चे जब आगे निकल जाते हैं, पंखों के साथ फड़फड़ाने लगते हैं, खुले आसमान में उड़ने लगते हैं, अपना घर संसार बसा लेते हैं। दीपा तिवारी, प्रकाश जोशी, परितोष पांडेय, बाल प्रहरी के संपादक उदय किरौला, प्रवक्ता सोनिका नेगी, लोकेश जोशी, गंगाधर त्रिपाठी, सरल मनाली, निकिता त्रिपाठी, रूचि पांडेय आदि ने प्रस्तुतियां दी।
सरस्वती और विद्या मंदिर के बच्चों ने निकाली झांकियां
द्वाराहाट। मेले के अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर और विवेकानंद विद्या मंदिर के बच्चों ने घटगाड़ से शीतला पुष्कर मैदान तक जनजागरण करते हुए जय श्री राम का उद्घोष करते हुए झाकियां निकाली। इससे पूर्व त्रिमूर्ति चौराहे पर तीनों विभूतियों के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। जिसमें नगर पंचायत और मेला समिति अध्यक्ष मुकुल साह तथा सरस्वती और विद्या मंदिर के बच्चे शामिल रहे।
12 जोड़े नगाड़े निशानों के साथ पहुंचे ग्रामीण
द्वाराहाट (अल्मोड़ा )। बिखोती मेले के तहत विमांडेश्वर मंदिर में बुधवार देर रात 12 जोड़े नगाड़े निशानों ने शिरकत कर मेले की प्राचीन और ऐतिहासिक संस्कृति को बचाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। बुधवार की रात्रि मेले में रणां, वलना, गवाड़, कोटीला, कुई, गुपटली, छतगुल्ला, असगोली (सुनखवा), सिमलगांव, बेढुली, बूंगा और सलना के ग्रामीणों ने नगाड़े निशानों आदि वाद्य यंत्रों के साथ झोडे़ चाचरी गाते हुए पहुंचे। सभी ग्रामीण अपने अपने क्षेत्रों से ढोल, नगाड़े, निशानों, श्रंकार खेलते हुए झोड़े चांचरी गाते हुए देर रात्रि मंदिर परिसर में पूर्व निर्धारित डेरों में पहुंचे और झोड़े चांचरी गाए। सुबह गुप्त सरस्वती, सुरभि, नंदिनी की त्रिवेणी में स्नान कर पूजा अर्चना के बाद अपने अपने गांवों को वापस लौटे। इधर, बूंगा के युवाओं की मंदिर परिसर में डांडिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही।

बिखोती मेले में सांस्कृतिक जुलूस निकालते सरस्वती और विद्या मंदिर के बच्चे। संवाद- फोटो : RANIKHET

्याल्दे बिखोती मेले में निशान लहराते उत्साहित ग्रामीण। संवाद- फोटो : RANIKHET

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