अल्मोड़ा। एक तरफ देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है वहीं दूसरी तरफ भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जन्म स्थल खूंट गांव आज भी उपेक्षित हैं। पंत के पैतृक गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। ग्रामीण खूंट में मिनी स्टेडियम बनाने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं लेकिन अब तक धरातल पर कुछ नहीं हुआ। गांव में पेयजल समेत तमाम समस्याएं बनी हैं।
जिले का खूंट गांव किसी परिचय का मोहताज नहीं है। यूपी के पहले मुख्यमंत्री और भारत के चौथे गृहमंत्री रहे भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जन्म इस गांव में हुआ था। उपेक्षा के चलते यहां के ग्रामीण आज भी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। गर्मी के मौसम में इस गांव में दो-दो दिन तक पेयजल आपूर्ति ठप रहती है। ग्रामीण स्थानीय नौले से पानी लाकर काम चलाते हैं। कई बार वहां भी पानी सूख जाता है। हर घर जल योजना के तहत गांव के सभी घरों में पेयजल कनेक्शन हैं लेकिन नलों में पानी नहीं टपकता है।
गांव के लोग लंबे समय से मिनी स्टेडियम बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक स्टेडियम नहीं बन सका है। खेल मैदान के अभाव में गांव के बच्चे खेतों में खेलने को मजबूर है। जिससे खेल प्रतिभाएं भी नहीं उभर रहीं हैं। आईटीआई खूंट में पर्याप्त ट्रेड नहीं है। क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है। गांव के लोग महारुद्रेश्वर मंदिर को धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की मांग भी करते आ रहे हैं लेकिन अब तक इसके लिए भी कोई काम नहीं हुआ है।
जीआईसी में पांच साल से नहीं प्रधानाचार्य
अल्मोड़ा। जीआईसी खूंट के भवन जर्जर हालत में है। बारिश होने पर छत से पानी टपकता है जिससे कक्षाओं के संचालन में मुश्किल होती है। अभिभावक संघ के सचिव/ हिंदी प्रवक्ता माधो सिंह बिष्ट ने बताया कि विद्यालय में पांच साल से प्रधानाचार्य का पद खाली है। एलटी संवर्ग में विज्ञान, गणित और अर्थशास्त्र प्रवक्ता का पद भी रिक्त चल रहा है। विद्यालय में छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर तक नहीं हैं। खेल का मैदान भी बहुत छोटा है।
बंदरों से खेतीबाड़ी पर संकट
अल्मोड़ा। बंदरों के आतंक से खूंट गांव में खेती करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीण साल भर खेतों में पसीना बहाते हैं लेकिन बंदर पलक झपकते ही फसल को नष्ट कर देते हैं। इससे कई ग्रामीण खेती- किसानी छोड़ कर दूसरे रोजगार की तलाश में गांव से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण
गांव ने देश को भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ जैसा नेता दिया लेकिन आज उसी गांव की उपेक्षा हो रही है। गांव के लोग सुविधाओं को तरस रहे हैं। पेयजल की समस्या बनी है। सरकारों को गांव के विकास पर ध्यान देना चाहिए।
- सरिता देवी, प्रधान खूंट
भारत रत्न गोविंद बल्लभ पंत से ही खूंट गांव की पहचान है। गांव में आज भी कई समस्याएं हैं। कई बार सरकारों से समस्याओं के समाधान की गुहार लगाई लेकिन अब तक समस्याएं जस की तस हैं।
- मनोज राम, खूंट
गर्मी के दिनों पेयजल की समस्या से पूरा गांव परेशान रहता है। गांव में जल्द मिनी स्टेडियम बनाया जाना चाहिए ताकि गांव की खेल प्रतिभाएं विश्व पटल तक पहुंच सके। खेल मैदान न होने से बच्चे खेतों में खेलने को मजबूर हैं।
- त्रिलोक राम, खूंट