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सोमेश्वर में भी नहीं सुधरी स्वास्थ्य व्यवस्था

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सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड बनने के 17 साल बाद भी सोमेश्वर घाटी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। सत्तारूढ़ रही सरकारें और जनप्रतिनिधि बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे जरूर करते हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं हो रहा है।
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प्रदेश सरकार ने पौने पांच करोड़ लागत से सोमेश्वर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) स्तर का भवन करीब आठ साल पहले बना दिया लेकिन अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सोमेश्वर को सालों बीतने के बाद भी सीएचसी में उच्चीकृत नहीं किया गया है। अस्पताल में पैथोलॉजी, एक्स-रे जैसी मामूली सुविधाएं तक नसीब नहीं हो पाती हैं। सामान्य बीमारी में मरीजों को 40 से 52 किमी दूर अल्मोड़ा या रानीखेत ले जाना पड़ता है।

अस्पताल में एक महिला डॉक्टर और एक आयुर्वेदिक डाक्टर तैनात हैं, जबकि प्रभारी चिकित्साधिकारी हवालबाग अटैच हैं। अस्पताल में पैथोलॉजी, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड जैसी मामूली सुविधाएं भी नहीं हैं। जनता की मांग पर सरकार ने अस्पताल के उच्चीकरण की घोषणा की पर शासनादेश अब तक नहीं हुआ।
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31 अक्तूबर 2004 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री तिलक राज बेहड़ ने करीब पौने पांच करोड़ लागत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन का शिलान्यास किया। 3 मई 2010 में बनकर तैयार भवन का भाजपा सरकार के तत्कालीन मंत्री बलवंत सिंह भौर्याल ने लोकार्पण किया।


नया भवन बने करीब आठ साल होने को हैं लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकरण नहीं हो पाया है। रक्त परीक्षण, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड के अभाव में मरीजों को उपचार के लिए 40 किमी दूर अल्मोड़ा या 52 किमी दूर रानीखेत जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में गरीबों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे लोगों में सरकार, स्वास्थ्य विभाग और शासन-प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है।
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अस्पताल के उच्चीकरण का मामला शासन स्तर का है। इस संबंध में शासन को लिखा गया है। - डॉ. निशा पांडे, सीएमओ, अल्मोडा।
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