देघाट/भिकियासैेण (अल्मोड़ा)। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 19 अगस्त को स्याल्दे ब्लॉक के चौकोट क्षेत्र के दो रणबांकुरे हरिकृष्ण उप्रेती और हीरामणि बडोला अंग्रेजों की गोली से शहीद हो गए। अंग्रेजों ने इस क्षेत्र के कई अन्य क्रांतिकारियों को यातनाएं दीं। देश की आजादी में महान योगदान देने वाले इन क्रांतिकारियों को हर साल 19 अगस्त को याद किया जाता है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए अंग्रेजों भारत छोड़ो नारे के बाद चौकोट क्षेत्र में भी क्रांतिकारियों ने जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया। 19 अगस्त 1942 को क्रांतिकारियों ने देघाट में एक आमसभा की और पटवारी चौकी का घेराव कर दिया। इस बीच तत्कालीन पटवारी द्वारा एक आंदोलनकारी को बेवजह बंद कर देने की घटना ने आग में घी डालने का काम किया। जिससे आंदोलन और भड़क गया।
आंदोलन की ज्वाला को दबाने के लिए अंग्रेज हुकूमत के परगना मजिस्ट्रेट रानीखेत जॉनसन लाव लश्कर के साथ पहुंच गए। आंदोलन तेज होता देख उन्होंने सिपाहियों को निहत्थे क्रांतिवीरों पर गोली बरसाने का हुक्म दे दिया। इस घटना में भेलीपार गांव निवासी हरिकृष्ण उप्रेती और खल्डुवा निवासी हीरामणि बडोला शहीद हो गए। अंग्रेजों ने इसके अलावा क्षेत्र के महान क्रांतिवीरों खीमानंद, दीवान सिंह, कुशल सिंह, ज्योति राम, गंगा सिंह, चिंतामणी, देवीदत्त, दीवान सिंह, नंदकिशोर, प्रेम सिंह, बचे सिंह, भगत सिंह, रामदत्त, लक्ष्मण सिंह, हर्षदेव प्रथम, हर्षदेव द्वितीय और राधा देवी समेत अनेक लोगों को गिरफ्तार करके कठोर यातनाएं दीं।