चारधाम यात्रा के दौरान चक्रवाती तूफान 'रॉनू' का आना शासन-प्रशासन की उलझनें बढ़ा सकता है। हालांकि जंगल की आग, यात्रा और बारिश के मद्देनजर शासन ने किसी भी आपदा से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रखी है। आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन विभाग का कहना है कि हर जिले में जिला आपदा परिचालन केंद्र चौबीस घंटे काम कर रहे हैं। रिलीफ टीमें जगह-जगह मौजूद हैं।
बरतें एहतियात
आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन विभाग का कहना है कि गर्मी ज्यादातर मैदानी इलाकों में है। जहां लो प्रेशर बनेगा वहां तूफान की आशंका अधिक रहती है। इसके साथ ही लोगों से अपील की जा रही है कि एहतियात बरतें।
खासतौर पर घरों में आग जलती न छोड़ें। जिनके कमजोर मकान हैं, वे चक्रवाती तूफान के दौरान अलग कहीं व्यवस्था कर लें। ऐसे में ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा रहता है। बारिश के दौरान किसी पेड़ के नीचे खड़े न रहें।
एसडीआरएफ तैनात
विभाग का कहना है कि इस वक्त जगह-जगह एसडीआरएफ की टीमें मुस्तैद हैं। बचाव दलों को तैनात किया गया है। कहीं कोई गड़बड़ी की सूचना मिलते ही टीमें फौरन मौके पर पहुंच जाएंगी।
विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी संतोष बडोनी ने लोगों से अपील की है कि जब तेज गति से हवाएं चलें तो सफर न करें। वाहन को किसी सुरक्षित स्थान पर खड़ा करके रुक जाएं। किसी पेड़ के नीचे वाहन खड़ा न करें, तेज हवा से पेड़ गिर सकता है।