विधानसभा सत्र के दौरान 18 मार्च को उपजे सियासी संकट के बाद तमाम राजनीतिक झंझावतों से होते हुए आखिर बागी विधायकों ने दिल्ली में भाजपा का दामन थाम लिया।
सभी बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने के कयास उसी दिन से लगाए जा रहे थे, जब सभी विधायक पहले तो भाजपाई विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे, जहां उन्होंने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में हस्ताक्षर किए और फिर उसी रात भाजपा आलाकमान के नेताओं की सरपरस्ती में विशेष विमान से दिल्ली रवाना हुए।
भाजपा के नेता कर रहे थे विरोध
बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने को लेकर पहले से ही कई तरह की चर्चाएं थीं। इनके निर्वाचित क्षेत्रों में कुछ भाजपाइयों ने इनका विरोध भी किया। कुछ भाजपा नेताओं ने दबी जुबान में अपनी बात आलाकमान तक पहुंचाई तो कुछ ने खुलकर विरोध किया। लेकिन केंद्रीय आलाकमान ने सारी बातों को दरकिनार कर सभी बागी विधायकों को न सिर्फ पार्टी में शामिल किया, बल्कि यह संकेत भी दे दिया है कि इन विधायकों को आगामी विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेसी प्रत्याशियों के सामने चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है।
नौ अंक का कमाल
उत्तराखंड की राजनीति में पिछले दो माह से जारी सियासी संकट में नौ अंक ने गजब का ज्योषितीय कारनामा दिखाया है। अंक ज्योतिषियों की मानें तो नौ का अंक इन बागी विधायकों के लिए कभी गम तो कभी खुशी लेकर आया।
अंक ज्योतिष के हिसाब से बागी विधायकों ने 18 मार्च को कांग्रेस से बगावत की। 18 का मूलांक नौ बनता है। अब जबकि इन विधायकों ने 18 मई को भाजपा का दामन थामा है तो एक बार फिर मूलांक नौ है।