वैज्ञानिकों को हिमालय क्षेत्र में किसी बड़े भूकंप की आहट मिल रही है। भूगर्भ में आ रहे बदलाव की वजह से हिमालय रेंज में सात से आठ तीव्रता का भूकंप कभी भी दस्तक दे सकता है। नेपाल में आए भूकंप के बाद से वैज्ञानिकों को इसके संकेत मिलने लगे थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक लंबे समय से सुसुप्तावस्था में पड़ीं हिमालय रेंज की भूकंप पट्टियां सक्रिय हो गई हैं।
इन पट्टियों की पहचान कर निगरानी की जा रही है। अध्ययन में पाया गया है कि मध्य हिमालय क्षेत्र में अगर कोई बड़ा भूकंप आया तो इससे दिल्ली और पूरा एनसीआर क्षेत्र प्रभावित होगा।
हिमालय क्षेत्र में काम कर रहे अमेरिका, जर्मनी और इटली के वैज्ञानिकों ने मध्य हिमालय क्षेत्र की पर्वतीय श्रंखलाओं की ऊंचाई बढ़ने के मद्देनजर बड़े भूकंप की आशंका व्यक्त की है।
अमेरिकी वैज्ञानिक साइमन क्लैम्परर ने कहा कि बड़ा भूकंप 80 से सौ साल के बाद आता है। मध्य हिमालय क्षेत्र में बड़ा भूकंप आए 213 साल बीत चुके हैं।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के शोध में भूकंप पट्टियों के सक्रिय होने की पुष्टि हुई है। पट्टियों की सक्रियता हिमालय क्षेत्र में बड़े भूकंप की आशंका बढ़ा रही है।
1803 में आया था हिमालय क्षेत्र में बड़ा भूकंप वर्ष
इस क्षेत्र में आए भूकंपों का अध्ययन हो रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग ने स्थिति का अध्ययन और आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन के संबंध में काम शुरू कर दिया है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक मध्य हिमालय क्षेत्र में बड़ा भूकंप वर्ष 1803 में आया था। इसके झटके से दिल्ली में कुतुब मीनार का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। इसके साथ ही मथुरा और आसपास के क्षेत्र में नुकसान हुआ था।
इस भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी के पास था। इसके बाद इस क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया। इसी वजह से वैज्ञानिक एक और बड़े भूकंप को लेकर आशंकित हैं।