विधायकों की खरीद-फरोख्त और पंद्रह साल में तीन की बजाय नौ सीएम बनना पहाड़ी प्रदेश के लिए किसी दुर्भाग्य से कम नहीं है। वैसे तो राज्य गठन के समय ही केंद्र शासित प्रदेश बनना चाहिए था लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस प्रदेश को विकास की बजाय विनाश की ओर ज्यादा धकेला है।
शुक्रवार को विधानसभा में हुए हंगामे और अब हो रही विधायकों की तथाकथित खरीद-फरोख्त का यूकेडी विरोध करेगी और जनता को जागरूक करने की कोशिश करेगी कि पंद्रह साल बाद भी प्रदेश के मूलभूत मुद्दों को लेकर दोनों राष्ट्रीय दलों का कोई ध्यान नहीं गया। विडंबना ही है कि उत्तर प्रदेश से अब तक परिसंपत्तियों का बंटवारा तक नहीं हो पाया है।
विधायकों की हो रही खरीद-फरोख्त
शनिवार को प्रेस वार्ता में उत्तराखंड क्रांति दल के त्रिवेंद्र पंवार ने बताया कि राज्य में पिछले 15 सालों में आज तक सिर्फ विधिवत रूप से तीन मुख्यमंत्री होने चाहिए थे लेकिन भाजपा और कांग्रेस की अदूरदर्शी सोच और नीतियों के कारण अब तक यहां नौ सीएम बनाए जा चुके हैं।
क्षेत्र के विकास और मूलभूत समस्याओं सहित परिसंपत्तियों को लेकर आज तक कोई पहल नहीं की गई। प्रदेश के लिए कृषि, रोजगार, पलायन आदि नीतियों पर कभी दोनों दलों का ध्यान नहीं गया।
पहले तो प्रदेश गठन के बाद कम से कम 10 साल तक केंद्र शासित प्रदेश उत्तराखंड को बनाया जाना चाहिए था लेकिन दोनों राष्ट्रीय दलों के अति महत्वाकांक्षी नेताओं ने ऐसे नहीं होने दिया।
उत्तराखंड जैसे शांत प्रदेश में विधायकों की खरीद-फरोख्त होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसकी घोर निंदा की। इस दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष एनके गुसाईं, बलवेंद्र सिंह नेगी, सुरेंद्र पेटवाल, समीर मुखर्जी, सौरभ, अशोक मौजूद रहे।