16 जून की शाम को ही केदारनाथ में आपदा ने दस्तक दे दी थी, करीब 100 लोगों को बाढ़ अपने साथ बहा ले गई थी।
शाम साढ़े सात बजे आरती के बाद अचानक एक भयंकर आवाज आई और सभी लोग भयभीत होकर मंदिर के तीनों परिसरों में समा गए। जिन्हें जगह नहीं मिली, वे बाबा केदार के मंदिर की दीवारों से चिपके रहे।
पूरी रात खड़े-खड़े काटी
मंदिर के पीछे से आया पानी का जलजला शंकराचार्य का समाधि स्थल, मंदिर समिति की बिल्डिंग, भारत सेवा आश्रम सहित करीब 100 लोगों को अपने साथ बहा ले गया। लोगों ने पूरी रात खड़े-खड़े काटी। मंदिर समिति के धर्मार्थ चिकित्सालय में वैद्य के पद पर कार्यरत लोकेंद्र प्रसाद रूवाड़ी ने बताया कि इस घटना में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री भी चपेट में आए थे जिन्हें मैंने इलाज दिया।
लोकेंद्र प्रसाद रूवाड़ी बताते हैं कि दूसरे दिन सुबह भी उसी समय गांधी सरोवर से जब पानी फटकर निकला, तो उसमें करीब 40 मीटर ऊंची लहरें थी। मंदिर के दायीं ओर हजारी भवन के दूसरे मंजिल पर खड़ा होकर मैं यह दर्दनाक मंजर देख रहा था। मुझे लगा कि अब मेरा अंत समय है। 12 मृतक गणेश द्वार पर ही पड़े थे।
घायलों तथा बीमारों की मदद की
करीब 10 मिनट में ही पूरी केदारपुरी तहस-नहस कर यह प्रवाह कहां निकल गया, कुछ पता नहीं चला। इस घटना में मैं और कई डाक्टर सुरक्षित बच गए। मैंने तथा राजकीय चिकित्सालय के डा. भंडारी और एक डॉक्टर तथा फार्मासिस्ट चमोली ने पांच दिनों तक बदरी-केदार मंदिर समिति के अस्पताल में घायलों तथा बीमारों की मदद की। कई लोगों को ऑक्सीजन मास्क लगाए गए।
सब बर्बाद हुआ
केदारनाथ घाटी में हुई घटना ल्वाणी गांव के बगवाड़ी परिवार तथा द्यूली गांव के तिवाड़ी परिवार के आठ-आठ युवाओं को लील गई। यह एक परिवार का दर्द नहीं बल्कि बामसू, ल्वारा, लमगौंडी, फहली, नागजगई, भणीग्राम सहित कई गांवों की यही दास्तां है।
दिल्ली पुलिस में कार्यरत गीता शुक्ला सिसकियां भरते हुए कहती हैं कि छुट्टियों में अपने मायके आई थी। मेरे गांव में ही नहीं, आसपास के दर्जनों गांवों में एक-एक परिवार उजड़ गया है। परिवार के कर्ताधर्ता चले गए, सब कुछ बर्बाद हो गया।
15 एनआरआई दल ने बदला प्लान
गुजरात के यात्रियों और विदेशी यात्रियों को चार धाम यात्रा कराने वाले अतिथि ट्रैवल्स के 15 एनआरआई अपनी यात्रा का रूट बदल चुके हैं। कंपनी के मालिक मनीष चावड़ा ने बताया कि अमेरिका तथा लंदन से आए विदेशी यात्रियों को 17 जून से यात्रा शुरू कर मसूरी, यमुनोत्री, गंगोत्री, गुप्तकाशी, केदारनाथ तथा बदरीनाथ की यात्रा करनी थी।
16 जून को हुई त्रासदी के बाद इस ग्रुप ने अपना कार्यक्रम बदलकर अन्य क्षेत्रों में घूमने का बनाया। कंपनी के चारधाम संयोजक कालीशंकर थपलियाल ने बताया कि इस वर्ष यात्रा सीजन शुरू होने के बाद वे 12 ग्रुपों को चार धाम यात्रा करा चुके हैं।
प्रचंड प्रवाह को देख अवाक रह गए
ऊखीमठ पंचग्राम समिति के संयोजक डा. राकेश भट्ट गत वर्ष ऊखीमठ हादसे में मारे गए लोगों के लिए श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन के लिए गए थे। 9 से 15 जून तक के कार्यक्रम के बाद 15 जून को ही केदारनाथ के लिए रवाना होने का कार्यक्रम था, लेकिन एक टीवी चैनल पर मौसम विभाग की चेतावनी देखने के बाद उन्होंने कार्यक्रम बदल दिया।
16 जून को वे ऊखीमठ से श्रीनगर के लिए वापस होते, लेकिन बारिश तेज होती रही। इस बीच चुन्नी बैंड से करीब सुबह सवा नौ बजे उन्होंने मंदाकिनी के प्रलयकारी प्रवाह को देखा तो अवाक रह गए। यह प्रवाह अपने साथ विद्यापीठ स्थित पुल को भी उड़ा ले गया।