प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का सह संस्थापक यासीन भटकल पूर्वांचल के आतंकियों का आका रहा है।
यूपी में वाराणसी के शीतला घाट में हुए बम विस्फोट में इसका नाम सामने आया था। यासीन के साथ पकड़े गए असदुल्लाह उर्फ तबरेज के बारे में एटीएस दिल्ली स्थित बाटला हाउस मुठभेड़ के बाद से ही केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मुहैया करा रही थी।
शीतलाघाट पर सात दिसंबर 2010 को आतंकियों ने पत्थर के नीचे बम रखकर विस्फोट किया था। धमाके में एक साल की मासूम स्वस्तिका और मध्यप्रदेश से आई महिला फूल रानी की मौत हो गई थी और 40 लोग घायल हुए थे।
घटना के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां भटकल की तलाश में थी। लोकसभा में भी शीतलाघाट का मुद्दा उठने पर सुरक्षा एजेंसियों की काफी किरकिरी हुई थी।
उस समय भी सुरक्षा एजेंसियां यासीन भटकल और रियाज भटकल के साथ आजमगढ़ से जुड़े आतंकियों पर शक जता रही थी।
एजेंसियों का मानना है कि भटकल बंधु पूर्वांचल से जुड़े आरिज उर्फ जुनैद, खालिद, साजिद उर्फ बड़ा साजिद असदुल्लाह उर्फ तबरेज, वासिक उर्फ विल्ला और डॉक्टर शहनवाज को किसी भी घटना को अंजाम देने के लिए आर्डर देते थे।
इनमें शहनवाज ने तबरेज के नेतृत्व में एक टीम गठित की थी। बाटला हाउस मुठभेड़ के बाद से ही पूर्वाचल के आतंकियों के बारे एटीएस लगातार इनपुट दे रही थी। दिल्ली में बाटला हाउस से तबरेज भागने में सफल हो गया था।
यहां से भागने पर 11 आतंकी नेपाल में ही डेरा जमाए थे। एटीएस समेत अन्य एजेंसियों का दबाव बढ़ने पर आतंकी खाड़ी देशों की तरफ भाग निकले।
असदुल्लाह का एक माह पहले किया था पीछा
सुरक्षा एजेंसियां डाक्टर शहनवाज और असदुल्लाह की कॉल्स को काफी दिनों से सुन रही थी।
पिछले माह एटीएस ने तबरेज का बांग्लादेश की सीमा तक पीछा किया था लेकिन लखनऊ से काफी दूरी होने के कारण पुलिस टीम देर बाद वहां पहुंची। इस बीच आतंकी भागने में सफल हो गए थे।