गुरुवार की सुबह नवरात्र की अष्टमी पर जहां कन्याओं को पूजने की तैयारी हो रही थी वहीं दूसरी ओर एक कन्या दरिंदगी का शिकार हो गई। थाना बन्ना देवी क्षेत्र में एक दलित बच्ची की निर्ममता से हत्या कर दी गई।
घटना से उपजे आक्रोश को ठंडा कराने के बजाय पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठीचार्ज, आंसू गैस और रबर बुलेट छोड़ी।
महिलाओं और बच्चों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया। टकराव में सीओ, एसओ व आधा दर्जन पुलिस कर्मी सहित डेढ़ दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए।
डीआईजी ने भी माना कि इस घटना में महिलाओं, बच्चों और प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया।
एक कांस्टेबिल और पीएससी के एक हेड कांस्टेबिल को निलंबित कर दिया गया है। जबकि सीओ (द्वितीय) एके सिंह को लाइन हाजिर करते हुए कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
पुलिस ने पार्षद सहित तीन दर्जन से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया, जिन्हें छुड़ाने के लिए भी थाने का घेराव व हंगामा हुआ।
बन्नादेवी क्षेत्र के लच्छिमपुर नगला कलार में रहने वाले एक दंपति के छह बच्चे हैं। बुधवार रात 6 वर्षीय बेटी पिता के साथ घर के दरवाजे पर गली में चारपाई पर सोयी थी।
रात 1.30 बजे पिता की आंख खुली तो बेटी चारपाई से गायब थी। तत्काल कंट्रोल रूम को खबर दी गई तो बन्नादेवी पुलिस 2 घंटे तलाश करने के बाद यह कहते हुए लौट गई कि अब सुबह थाने पर फोटो आदि लेकर आना।
इसके बाद सुबह करीब 5.30 बजे पास के एक प्लाट में लोगों ने बच्ची का शव पड़ा देखा तो खबर परिवार व पुलिस को दी गई। शव की हालत देख कर लग रहा था कि उसकी दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या की गई है।
मौके पर पहुंची पुलिस ने विलाप कर रही महिलाओं के बीच से बच्ची के शव को उठाने का प्रयास किया तो महिलाओं ने विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने शव को कब्जे में लेते हुए बाईपास पर जाम लगा दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इसी दौरान सीओ द्वितीय मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को शांत करने के स्थान पर उनसे ही उलझ गए। इससे स्थिति और बिगड़ गई, प्रदर्शनकारी और आक्रोशित हो गए।
पुलिस ने भीड़ पर जमकर लाठीचार्ज किया। महिलाओं बच्चों सहित बच्ची के मां-बाप को भी पीटा। सीओ एके सिंह ने ईंट लेकर दौड़ती एक बुजुर्ग महिला को पीटते हुए धकिया दिया। पथराव में एसओ बन्ना देवी घायल हो गए।