कुंडा के पूर्व सीओ जियाउल हक की मौत पर उनके परिवार के दो लोगों को नौकरी देने के मामले में प्रदेश सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में सीधे मुख्य सचिव को पक्षकार बना दिया है।
प्रदेश का गृह विभाग कोर्ट के इस सवाल का जवाब नहीं दे सका कि किस आधार या किस कानून के तहत एक परिवार के दो लोगों को नौकरी दी गई।
इसके बाद हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को पक्षकार बनाते हुए सीधे उनसे सवाल पूछा है।
न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह स्वयं अथवा किसी सचिव के माध्यम से विस्तृत शपथपत्र दाखिल कर न्यायालय द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दें।
मुख्य सचिव को प्रमुख सचिव गृह द्वारा न्यायालय में दिए गए जवाब की समीक्षा भी करने का निर्देश दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि जौनपुर की सीमा देवी द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एपी साही ने प्रदेश सरकार से यह विधिक प्रश्न उठाया कि सरकार की अनुकंपा नियुक्ति की क्या नीति है।
किन प्रावधानों के तहत सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद और भाई सोहराब अली दोनों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति दी गई। प्रमुख सचिव गृह सोहराब अली को नौकरी देने का कोई जवाब नहीं दे सके हैं।
जबकि परवीन आजाद के संबंध में उन्होंने कहा है कि सीओ जियाउल हक ने विपरीत हालात में अद्भुत वीरता और साहस का परिचय दिया तथा शहीद हुए इसलिए उनकी पत्नी को अनुकंपा पर नियुक्ति दी गई।
इस प्रकरण पर पूर्व में प्रमुख सचिव नियुक्ति भी अदालत के सवालों का जवाब नहीं दे पाए थे। उन्होंने कहा था कि दो लोगों को नियुक्ति देने की अनुशंसा गृह विभाग द्वारा की गई थी।
बता दें कि सीमा देवी के पति इंटर कालेज में अध्यापक थे। उनकी मृत्यु के बाद विभाग ने उनकी पहली पत्नी को अनुकंपा पर नियुक्ति दे दी।
सीमा देवी दूसरी पत्नी हैं। उन्होंने याचिका दाखिल कर मांग की है कि जब जियाउल हक के परिवार से दो लोगों को अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है तो उनको क्यों नहीं।