डौंडिया खेड़ा स्थित राव राम बक्स सिंह के किले को अंग्रेजों ने तोप से गोले दागकर गिरवाया था। मजदूर जब 12वीं शताब्दी से पहले के बने इस किले को नहीं गिरा पाए, तब अंग्रेजों को यह फैसला लेना पड़ा था।
पुरातत्व विभाग की खुदाई में मिल रहे ईंट के छोटे-छोटे टुकड़े अंग्रेजों की कार्रवाई की कहानी बयान कर रहे हैं।
राव राम बक्स सिंह डौंडिया खेड़ा के जिस किले में परिवार के साथ रहते थे, वह उनके पूर्वजों को वीरता के दम पर मिला था। गंगा नदी के बिल्कुल सटे काफी ऊंचाई पर बने इस किले के दो ओर घने जंगल और एक ओर से गंगा नदी रक्षा करती थी।
जब राव राम बक्स सिंह ने अंग्रेजों को मरवा दिया था तो ब्रिटिश हुकूमत ने उनको पकड़ने का आदेश दिया था। अंग्रेजी फौजें डौंडिया खेड़ा पहुंचतीं इससे पहले ही राव वहां से निकल चुके थे।
अंग्रेजों ने राव की दोनों पत्नियों को हिरासत में लेकर महल पर कब्जा कर लिया था। लूटपाट भी की थी। जब राव साहब को वाराणसी से गिरफ्तार कर डौंडिया खेड़ा में फांसी दी गई तो जाते-जाते अंग्रेजों ने इस किले को नेस्तनाबूद करने का हुक्म दिया।
मजदूरों ने किले को तोड़ना शुरू किया लेकिन चौड़ी दीवारें गिर ही नहीं पा रही थीं। इसके बाद अंग्रेजों ने तोप के गोले दागकर दीवारों को गिराना शुरू किया।
तोप के गोलों से दीवार का कुछ भाग और छत गिर गई। फिर अंग्रेज वहां से चले गए। किले का बड़ा हिस्सा गंगा नदी में बह चुका है।