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हाथ में आधुनिक हथियार, रेलवे पुलिस बल क्यों है लाचार?

Sun, 16 Jun 2013 12:56 AM IST
झांसी/ब्यूरो
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रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के पास वर्दी है, आधुनिक असलहे हैं, लेकिन जब बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई की बात आती है तो उसकी धार कुंद पड़ जाती है।
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रेलवे एक्ट में कोई विशेष कानूनी धाराएं नहीं होने से आरपीएफ को जीआरपी पर आश्रित रहना पड़ता है। आरपीएफ एसोसिएशन द्वारा दोहरी व्यवस्था को खत्म करने की मांग लंबे समय से अनसुनी है।

रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा के लिए रेलवे सुरक्षा बल का गठन कर इस बल को सभी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया।

स्टेनगन, एसएलआर के अलावा अन्य आधुनिक असलहे जवानों के पास हैं। लेकिन, अधिकार सीमित रखे गए। उसे सिर्फ 3 आरपीयूपी एक्ट में कार्रवाई का अधिकार दिया गया।

इस धारा में अधिकतम पांच साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन इसका उपयोग केवल रेल संपत्ति चोरी के मामले में ही किया जा सकता है।

2003 में रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स एक्ट का विस्तार कर आरपीएफ के कार्य और अधिकारों का दायरा बढ़ाया गया, लेकिन सिगरेट पीने पर रोक, रेल पटरी पार करने, चेन पुलिंग, गलत तरीके से यात्रा करने, गंदगी फैलाने, रेलवे क्षेत्र में अनधिकृत रूप से घूमने और छत पर यात्रा करने पर वालों पर कार्रवाई करने का ही अधिकार मिला।
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अगर ट्रेन में लूटपाट होती है, जहरखुरानी होती है या फिर चोरी होती है तो आरपीएफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकती। आरपीएफ के पास एफआईआर दर्ज करने का अधिकार नहीं है।

इस दोहरी नीति का फायदा बदमाशों को मिलता है। आरपीएफ एसोसिएशन का वर्ष 2007 से रेलवे की सुरक्षा एक एजेंसी को देने की मांग छह साल से लंबित है।
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