लोकतंत्र के महापर्व पर देवचरा की नई बस्ती का एक गरीब मजदूर हरी सिंह गुस्से में अपनी ही आहुति दे बैठा। हरी सिंह के पास पर्ची नहीं थी वह दो बार बूथ पर गया और उसे लौटा दिया गया। दूसरी बार पुलिस ने खदेड़ा तो वह सीधे घर गया और केरोसिन की कुप्पी साथ में लाया था।
गुस्से में चिल्लाते हुए उसने रामभरोसे लाल इंटर कॉलेज मतदान केंद्र के बाहर जाकर खुद पर कुप्पी उलट दी और तुरंत ही आग लगा ली। सुरक्षा कर्मियों ने आग बुझाकर उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया, लेकिन करीब 90 फीसदी झुलस चुके हरी सिंह ने कुछ देर बाद ही दम तोड़ दिया।
बीएलओ मान रहे हैं कि उन्हें हरी सिंह की दूसरी पर्ची बनाने में देर हुई क्योंकि वह व्यस्त थे। पीठासीन अधिकारी का कहना है कि सारा विवाद बूथ के बाहर हुआ, शिकायत उन तक पहुंचती तो कोई हल निकलता। इधर प्रशासन ने इसे नशे की परिणति बताते हुए कहा है कि मामले का निर्वाचन प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है। शव का डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराकर उसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
मतदान केंद्र पर नहीं डाल सका वोट
बदायूं के बिल्सी कस्बे के वार्ड पांच के मूल निवासी दिवंगत भूपाल सिंह के 35 वर्षीय बेटे हरीसिंह की पत्नी तारावती के अनुसार हरीसिंह मजदूरी करता था। बृहस्पतिवार की सुबह करीब छह बजे हरीसिंह और वह खुद वोट डालने के लिए निकले थे। मतदाता पहचान पत्र भी साथ थे लेकिन वोटर पर्ची नहीं थी।
हरीसिंह वोटर संख्या 1309 के रूप में दर्ज था। मतदान केंद्र पर उसका वोट बूथ संख्या 310 में था लेकिन बताया जा रहा है कि वह इसी केंद्र पर बूथ संख्या 312 पर पहुंचा। बकौल तारावती, वोट डलवाने के लिए मतदान कर्मियों से संपर्क किया तो उन्होंने पहले पर्ची लाने को कहा। इसके बाद उन्होंने बीएलओ से पर्ची मांगी, लेकिन उन्होंने भी पर्ची नहीं दी।
इसके बाद वह फिर से पति के साथ वोट डालने के लिए मतदान केंद्र पर पहुंची लेकिन इस बार भी सुनवाई नहीं हुई और सिपाहियों ने उन्हें फटकार कर भगा दिया।
आग लगाकर मतदान केंद्र परिसर में घुसा
इससे खफा होकर हरीसिंह सुबह करीब साढ़े नौ बजे घर से हाथ में कुप्पी और तेल का डिब्बा लेकर मतदान केंद्र के पास पहुंचा। यहां सड़क पर ही उसने तेल अपने ऊपर उड़ेलकर कुप्पी से कपड़ों में आग लगा ली और दौड़ते हुए मतदान केंद्र परिसर में घुस गया।
मतदान केंद्र पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने कंबल डालकर उसके कपड़ों की आग बुझाई। उधर से गुजर रहे मंडलायुक्त अजय कुमार सिंह और डीआईजी आरकेएस राठौर भी मौके पर पहुंच गए। डीआईजी की टीम के प्रभारी निरीक्षक वीर सिंह और उनके साथियों ने मतदान केंद्र के सुरक्षा कर्मियों की मदद से हरीसिंह को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया।
यहां इलाज के दौरान करीब साढ़े दस बजे हरी सिंह की मौत हो गई। डॉक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। प्रशासन ने इसकी वीडियोग्राफी भी कराई है।
'पत्नी से झगड़े के चलते उठाया आत्मघाती कदम'
बीएलओ सुनील कुमार का कहना है कि हरी सिंह और उनकी पत्नी तारावती की पर्ची मंगलवार को ही दे दी गई थी, सुबह जब हरी सिंह मेरे पास आए तो भीड़ लगी हुई थी। इसलिए उन्हें थोड़ी देर इंतजार करने को कहा था, लेकिन वह रुके नहीं और चले गए।
पीठासीन अधिकारी केदार सिंह मर्तोलिया ने बताया कि हरीसिंह और उनकी पत्नी तारावती वोट डालने के लिए मेरे पास आए ही नहीं, बाहर ही किसी से मिलकर चले गए होंगे। वे मुझसे आकर मिलते तो कोई हल निकालने की कोशिश भी करता। घटना को लेकर खुद भी हैरान हूं।
बरेली के जिला निर्वाचन अधिकारी और जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने कहा कि देवचरा में हरी सिंह के आत्मदाह की घटना का निर्वाचन प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है। एसडीएम और सीओ से संयुक्त रूप से जांच करवाई गई थी। जांच रिपोर्ट मिल गई है। हरी सिंह अवसादग्रस्त था और शराब के नशे में था। पत्नी से झगड़े के चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। उसे एंबुलेंस से तत्काल अस्पताल भिजवाया गया था, लेकिन दुर्भाग्य से बचाया नहीं जा सका।