राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सक्रियता के बाद विश्व हिन्दू परिषद भी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए ‘मतदाता भगवान’ को रिझाने के मिशन में जुटने जा रही है। यह रामजन्मभूमि आंदोलन जैसा आंदोलन नहीं होगा, बल्कि मतदाताओं के ‘ब्रेनवॉश’ की कोशिश की जाएगी।
पहले खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखने का दावा करने वाले इस संगठन ने शनिवार को खुला ऐलान कर दिया कि मोदी के लिए विहिप कार्यकर्ता और उससे जुड़े संत गांव-गांव पहुंचने जा रहे हैं। विहिप मुखिया अशोक सिंहल ने मतदाता बनाने और मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की तो शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने 300 लोकसभा सीटों के लक्ष्य को लेकर संतों से आगे आने का आह्वान किया है।
माघ मेला क्षेत्र में विहिप के शिविर में मार्गदर्शक मंडल के संतों की बैठक हुई। यह पहला मौका साबित हुआ जिसमें विहिप और संतों की बैठक में राम मंदिर, गौ और गंगा रक्षा जैसे मुद्दे गौड़ दिखे। सभी ने मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए गांव-गांव पहुंचकर मतदाताओं को जागरूक करने पर जोर दिया।
बाद में विहिप संरक्षक अशोक सिंहल ने कहा, पिछले महाकुंभ के दौरान फलाहारी बाबा ने मोदी को प्रधानमंत्री बनवाने का प्रस्ताव रखा, जिसका सभी संतों ने समर्थन किया। तब, भाजपा ने भी मोदी का नाम आगे नहीं किया था। अब विहिप विकास खंड स्तर पर संतों की अगुवाई में जागरूकता अभियान चलाएगी। इसमें बूथ स्तर पर मतदाता बनाने काम होगा। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए भी अभियान चलेगा।
अयोध्या मणिराम दास छावनी के संत और श्रीराम जन्मभूमि न्यास समिति कार्याध्यक्ष स्वामी नृत्यगोपाल दास ने कहा, राष्ट्रवादी सोच के लोगों ने चुनाव में सही निर्णय लेने में चूक की तो पांच साल फिर पछताएंगे। मोदी ने पूरे गुजरात में बिजली, पानी और बेरोजगारी की समस्याओं को सुलझाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी उनकी लहर है। संत समाज चाहता है कि वह प्रधानमंत्री बनें। शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने चीनी घुसपैठ, आतंकवादी हमले, नक्सलवाद, गोदामों में अनाज सड़ने, भुखमरी जैसे मुद्दों को उठाया और मोदी का समर्थन किया।