उत्तर प्रदेश के अयोध्या के फैजाबाद में विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय संग पहुंची टीम ने बुधवार को 84 कोसी परिक्रमा तैयारी की कमान संभाल ली।
सरकार की ओर से नई परंपराओं का हवाला देकर आयोजन रोकने की तमाम संभावनाओं पर भी चर्चा कर रणनीति बनाई गई।
सूत्रों के अनुसार पूरे प्रकरण पर आरएसएस और भाजपा के नेताओं से भी फीडबैक लिया गया, साथ ही गांव-गांव जनसंपर्क कर रही टीम से पड़ाव स्थलों पर विश्राम, सभाओं और प्रवचन के तय कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।
धार्मिक मामलों के प्रभारी व केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज ने 84 कोसी जनजागरण यात्रा में आने वाले प्रमुख धर्माचार्यों के नामों पर चर्चा की। तीन सौ किलोमीटर के यात्रा मार्ग में पड़ने वाले सैकड़ों गांवों समेत चौराहों-बाजारों में स्वागत की योजना बनाई गई।
विशेष संपर्क प्रमुख व केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने बताया कि यात्रा के पड़ाव पर होने वाले सत्संग के बाद लोग संकल्प करेंगे कि वह इस पावन भूमि के सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करेंगे।
एक प्रांत के संत को कम से कम दो दिन पद यात्रा में रहना है। अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल द्वारा 11 व 12 जून को हरिद्वार में तय की गई कार्ययोजना को मूर्त देने के लिए यात्रा मार्ग के गांवों के हिंदुओं को एकजुट करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय-प्रांतीय पदाधिकारी और कार्यक र्ता भी संतों के साथ पद यात्रा में शामिल होंगे। हालांकि कौन-कौन प्रमुख संत और विहिप नेता यात्रा में शामिल होने आ रहे हैं, इसका खुलासा विहिप नहीं कर रही है।
प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि यात्रा और सत्संग के दौरान सुरक्षा या अनुमति जैसे किसी भी विषय पर प्रशासन या सरकार से अनुरोध जैसे मसले पर कोई चर्चा नहीं हुई।
संतों की पद यात्रा निर्धारित मार्ग से पड़ाव स्थलों पर विश्राम व सत्संग करते हुए आगे बढ़ती जाएगी। इसमें कोई भी रुकावट विहिप बर्दाश्त नहीं करेगी।
परिक्रमा में सरकारी अड़चन बर्दाश्त नहीं
विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय का कहना है कि 84 कोसी परिक्रमा में कोई भी सरकारी अड़चन बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सूबे की मुलायम सरकार की 1990 जैसी गलती न दोहराए तो अच्छा रहेगा।
84 कोसी परिक्रमा संतों का आयोजन है, इसमें विहिप तंत्र की तरह काम रहा है जबकि संघ समेत तमाम संगठन व राजनीतिक दलों से सहयोग मांगा गया है।
कारसेवकपुरम आए चंपत राय ने अमर उजाला से कहा कि यह शुद्ध रूप से धार्मिक कार्यक्रम है, जिसे केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में देश के प्रमुख धर्माचार्यों ने तय किया है।