गुस्साए लोगों की भीड़ कुछ इस कदर उमड़ी थी कि पुराना पुल से लेकर पंचक्रोशी चौराहे तक सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी। गुस्साए लोगों को समझाने के लिए सारनाथ सहित चार थानों की फोर्स, पीएसी, क्यूआरटी और सीओ कैंट के साथ एसपी सिटी मौके पर डटे रहे।
एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि धनंजय के छोटे भाई मनोहर की तहरीर के आधार पर सारनाथ थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और सर्विलांस की मदद से भी सुरागकशी जारी है। परिजनों को आश्वस्त किया गया है कि पारदर्शी तरीके से जांच कर प्रकरण में प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। वारदात का खुलासा करने के लिए क्राइम ब्रांच सहित तीन टीम लगाई गई है।
भाजपा मंत्री के कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेता था धनंजय
खालिसपुर निवासी धनंजय चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। बड़े भाई संजय ने बताया कि राजनीतिक रूप से वह प्रदेश के मंत्री अनिल राजभर के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। धनंजय सिंहपुर स्थित एक बैंक से लोगों को कमीशन लेकर लोन दिलाने का काम करता था। इधर वह कई लोगों का लोन पास करवाया था। कभी-कभी वह अपने दोस्तों के यहां ही रात में रुक जाता था।
इस वजह से सोमवार की रात वह घर नहीं आया तो किसी को भी चिंता नहीं हुई। पांच वर्ष पूर्व सोनी से उसका विवाह हुआ था, फिलहाल दोनों के एक भी बच्चे नहीं हैं। उधर, धनंजय की हत्या की सूचना उसके परिजनों को मिली तो कोहराम मच गया। मां लीलावती की हालत बेसुधों जैसी थी। वह बार-बार यही कह रही थी कि काहे हमरे ललवा क गरदनिया कटलेस हो...। वहीं, पत्नी सोनी अचेत पड़ी हुई थी।
सुबह ही की गई हत्या, कहीं और से लाकर नहीं फेंका गया शव
धनंजय का शव जहां मिला उस इलाके के लोग उससे भलीभांति वाकिफ थे। पहले उस क्षेत्र में जन सेवा केंद्र संचालित करने के साथ ही अब भी धनंजय की आवाजाही वहां लगी रहती थी। पुलिस और स्थानीय लोगों का यह भी कहना था कि धनंजय के गले से बह रहे खून को देख कर यही प्रतीत हुआ कि उसकी हत्या सुबह पांच से छह बजे के बीच घटनास्थल पर ही की गई है। यदि हत्या रात में की गई होती तो खून नहीं बह रहा होता। इसके साथ ही यदि किसी अन्य जगह भी हत्या की गई होती और शव लाकर फेंका गया होता तो रास्ते में खून जरूर गिरा होता।