वाराणसी। अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर अनंत नाथ एवं देवाधिदेव पार्श्वनाथ का 108 रजत कलशों से मस्तकाभिषेक हुआ। मंगलवार को ग्वाल दास साहू लेन स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में विधि विधान परंपरा का निर्वहन हुआ। मंगलवार की शाम को श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में व्रतधारी केसरिया वस्त्रों में पांच भक्तों ने इंद्र के रूप में मंत्रोच्चार किया। इसके उपरांत रजत पांडुक शिला कमल सिंहासन पर विराजमान कर तीर्थंकर अनंत नाथ और पार्श्वनाथ का पंचाभिषेक से महामस्तकाभिषेक हुआ।
श्री दिगंबर जैन पंचायती शीशे वाले मंदिर में चौबीसी पूजन, देव शास्त्र पूजा, गुरु पूजा, विनय पाठ, अनंतनाथ पूजा, जिनेंद्र भगवान पूजा, शांति पाठ एवं महाअघ्र्य चढ़ाए गए। भक्तों ने इस वर्ष सभी मंदिरों में हो रहे पूजन अभिषेक को घरों से ही लाइव देखा। सारे विधि-विधान संपन्न करने के बाद अनंत सूत्र को अपनी बाहों में बांधा। आयोजनों की व्यवस्था में अध्यक्ष दीपक जैन, उपाध्यक्ष राजेश जैन, विनोद जैन प्रधानमंत्री अरुण जैन, समाज मंत्री तरुण जैन एवं सभी विभागों के मंत्रियों का योगदान रहा।
जैन मंदिरों में हुआ अभिषेक
अनंत चतुर्दशी पर्व पर विभिन्न जैन मंदिरों में पूजन अभिषेक संपन्न हुए। भगवान पार्श्वनाथ की जन्मस्थली भेलूपुर, भगवान श्रेयांसनाथ की जन्म स्थली सारनाथ, भगवान सुपार्श्वनाथ की जन्म स्थली भदैनी, चंदा प्रभु भगवान की जन्म स्थली चंद्रपुरी, चौबेपुर के अलावा नरिया, खोजवां, मैदागिन, हाथी बाजार, मझवा, भाट की गली में पूजन अभिषेक किया गया।
ये है पर्युषण पर्व
फेसबुक लाइव पर पं. सिद्धांत शास्त्री सांगानेर ने पर्व के अंतिम उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि नश्वर के पीछे छिपे हुए अविनश्वर को जो देख लेता है, जान लेता है वह परम ब्रह्म में रम जाता है। वह ब्रह्मचर्य से युक्त होकर ब्रह्म बन जाता है। पं. शास्त्री ने कहा कि आत्म चिंतन, आत्ममंथन, आध्यात्मिक चिंतन, परिधि के केंद्र की ओर लौटना ही पर्युषण पर्व है।
जैन धर्मावलंबी भादो मास में पड़ने वाले पर्व पर 10 वृत्तियों का व्रत लेकर मन, वाणी एवं शरीर आत्मा को शुद्ध करते हुए कठिन तपस्या एवं साधना से आत्मबल जगाते हैं। -राजकुमार बागड़ा, सदस्य
दशलक्षण महापर्व के दौरान मन शुद्धि, आत्मशुद्धि, उपवास, जपमाला, ध्यान, स्तुति, वंदना की जाती है। कोरोना के कारण सारे आयोजन ऑनलाइन किए गए हैं। -विजय कुमार जैन, पूर्व मंत्री