ई-कचरा भी बना खतरा
ई-कचरे में करीब 38 अलग-अलग प्रकार के रासायनिक तत्व शामिल होते हैं। टीवी व पुराने कंप्यूटर में लगी सीआरटी को रिसाइकल करना मुश्किल होता है। इस में लेड, मरक्यूरी केडमियम जैसे घातक तत्व होते हैं। कूड़े में पाया जाने वाले ई-कचरा हवा, मिट्टी, भूमिगत जल को प्रदूषित कर रहा है।
ये हैं दुष्प्रभाव
ओजोन परत के बढ़ते क्षय के कारण अनेकों दुष्प्रभाव हो सकते हैं। जैसे कि सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणें धरती पर वायुमंडल में प्रवेश कर सकती हैं। जो बेहद ही गर्म होती है और पेड़-पौधों व जीव जंतुओं के लिए हानिकारक होती है। शरीर में इन कारणों की वजह से त्वचा का कैंसर, अल्सर, मोतियाबिंद जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। यह किरणें मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित करती हैं।
ऐसे करें बचाव
ऐसे सौंदर्य प्रसाधन, एयरोसोल और प्लास्टिक के कंटेनर, स्प्रे जिसमें क्लोरोफ्लोरोकार्बन विद्यमान हैं, उन उत्पादों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। वाहन से अत्यधिक धुआं उत्सर्जन को रोकने के लिए वाहनों का नियमित रखरखाव करें। प्लास्टिक और रबड़ से बने टायर को जलाने से बचना चाहिए अधिक से अधिक पौधे लगाएं ताकि ऑक्सीजन अधिक से अधिक मात्रा में वायुमंडल में बनी रहे और इससे ओजोन अणुओं का निर्माण हो। रुई के गद्दे और तकियों का प्रयोग करें व फोम के उपयोग से बचे। मिट्टी के कुल्हड़ों, पत्तों की थालियों का प्रयोग करें।