बीएचयू आयुर्वेद संकाय के वैद्य सुशील दुबे ने बताया कि हृदय रोग में आयुर्वेद बहुत लाभकारी है। अर्जुन की छाल का पाउडर बनाकर या गाय के दूध में पाक बनाकर लेने से हृदय रोग की संभावना कम होती है। ब्राह्मी और जटामांसी जैसी औषधि दिमाग को शांत रखती हैं। दिमाग शांत रहने से हृदय के कार्य में बाधा नहीं आती है, जो दिल की धड़कन नियंत्रित करने में लाभकारी है।
पुनर्नवा कोलस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखता है। कुटकी लिवर पर काम करता है। सभी एंजाइम और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने से हृदय रोग का खतरा काफी कम हो जाता है। हल्दी व अलसी के उपयोग से भी दिल की बीमारियों से बचा जा सकता है।
बीएचयू हृदय रोग विभाग के डॉ. धर्मेंद्र जैन ने बताया कि अस्पताल के अलावा घर बैठे ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से भी सलाह ली जा सकती है। वर्तमान में ओपीडी में 100 से 150 मरीजों में हर दिन 3 से 4 की एंजियोप्लास्टी हो रही है। एक से दो को पेसमेकर लगाया जाता है। दिल में छेद का भी इलाज होता है। पांच साल में दिल के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 30 से 50 साल वाले अधिक हैं। इसमें महिलाएं भी शामिल हैं।
यह भी जानना है जरूरी
रोजाना कम से कम 15 मिनट व्यायाम जरूर करें। पैदल भी चलें, नियमित रूप से ध्यान करना फायदेमंद होता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के लिए तैलीय भोजन का सेवन करने से परहेज करें।