ऑपरेशन से पहले कागजात पर हस्ताक्षर के साथ ही नियमानुसार परिजनों को जानकारी भी देनी चाहिए लेकिन किसी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी। चिट्ठी में लिखा है कि जब ऑपरेशन के बारे में पूछा गया तो वहां मौजूद स्टाफ ने दुर्व्यवहार भी किया। गलत ऑपरेशन की वजह से संबंधित मरीज को अल्सर, मेमोरी लॉस, जबड़े में कंपन, मुंह में दर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या होने लगी। इसके बाद 18 मार्च को 2026 को न्यूरो सर्जरी की टीम ने दोबारा ऑपरेशन किया। वह 7 दिन तक अस्पताल में रहीं। मृत्युंजय ने बताया कि 27 मार्च की सुबह सांस लेने में तकलीफ हुई और कार्डियोपल्मनरी अरेस्ट की वजह से दादी की मौत हो गई।
ट्रॉमा सेंटर प्रभारी ने वीसी को भेजी रिपोर्ट, बताई हकीकत
आर्थोपेडिक्स विभाग की टीम के गलत सर्जरी करने की शिकायत का संज्ञान लेते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो.सौरभ सिंह से रिपोर्ट मांगी थी। प्रो.सौरभ ने कुलपति को भेजी रिपोर्ट में गलत सर्जरी का जिक्र किया है। बताया है कि न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती राधिका देवी की उम्र 71 साल जबकि आर्थोपेडिक्स विभाग में भर्ती राधिका देवी की उम्र 82 थी। रिपोर्ट में आर्थोपेडिक्स विभाग की बी टीम के 7 मार्च को दोपहर 12.45 बजे सर्जरी का जिक्र किया गया है। यह भी बताया कि स्पाइनल ट्यूमर से ग्रसित राधिका देवी की गलत सर्जरी करने की जानकारी तब मिली जब जांघ के पास चीरा लगाया गया और यहां की हड्डी सही दिखी। आनन-फानन में सर्जरी को रोककर तुरंत महिला को ऑपरेशन थियेटर से बाहर किया गया।
ट्रॉमा सेंटर में महिला की गलत सर्जरी के मामले में पोते मृत्युंजय पाल ने जो शिकायत की थी, उस पर आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने दो अप्रैल को चार सदस्यीय फैक्ट फाइडिंग कमेटी बनाई। इसमें आर्थोपेडिक्स विभाग के प्रो. अमित रस्तोगी को अध्यक्ष, न्यूरोसर्जरी के प्रो. कुलवंत सिंह, डेंटल फैकल्टी के प्रो. अजीत विक्रम परिहार को सदस्य और ट्रॉमा सेंटर के सहायक कुलसचिव को सचिव बनाया। कमेटी को 10 दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया। आईएमएस बीएचयू के निदेशक ने इस बारे में पूछे जाने पर बताया कि कमेटी गठन के बाद खुद प्रो. अमित रस्तोगी ने यह जानकारी दी कि जिस महिला की गलत सर्जरी की शिकायत की गई है वह सर्जरी उन्हीं की टीम के डॉक्टरों ने की थी। प्रो. रस्तोगी ने जांच कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाने को कहा था। निदेशक ने बताया कि कमेटी का चेयरमैन अब प्रो. अजीत को बनाया गया है। अब रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- ट्रॉमा सेंटर में आर्थोपेडिक्स, न्यूरोसर्जरी सहित जो भी सर्जरी के केस हो रहे हैं, उसमें डब्ल्यूएचओ सर्जिकल सेफ्टी चेक लिस्ट का पालन सुनिश्चित करने को सभी जिममेदार लोगों को कहा गया है। सर्जरी से पहले संबंधित मरीज के बारे में पूरी जानकारी करने को भी कहा गया है। इसमें किसी तरह की लापरवाही पर नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाएगी। -प्रो.सौरभ सिंह, प्रभारी ट्रॉमा सेंटर
-
- स्पाइनल ट्यूमर की वजह से दादी को न्यूरोसर्जरी में भर्ती करवाया था। आर्थोपेडिक्स टीम ने बिना किसी जांच के कैसे गलत सर्जरी कर दी, यह समझ से परे है। इतने बड़े संस्थान में ऐसा भी मरीज के साथ होगा, कभी सोचा नहीं था। कुलपति, निदेशक को जो शिकायत की थी, उस पर क्या कार्रवाई की जा रही है, इसकी कोई जानकारी भी नहीं दी जा रही है। न्याय की मांग की है, इसका मुझे इंतजार है। -मृत्युंजय पाल, राधिका देवी के पोते, बलिया