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Varanasi News: राष्ट्रीय बीज कांग्रेस में आज से बीज की चुनौतियों पर करेंगे मंथन

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28 से 30 नवंबर तक चलने वाले समारोह का कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही करेंगे उद्घाटन
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देश-विदेश के वैज्ञानिकों, बीज संस्थानों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। बनारस में 13वें राष्ट्रीय बीज कांग्रेस (एनएससी) का उद्घाटन बृहस्पतिवार को प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही करेंगे। अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) के आईसार्क में आयोजित इस सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान भी ऑनलाइन जुड़ेंगे। 28 से 30 नवंबर तक आयोजित इस सम्मेलन में बीज क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग, साझेदारी और ज्ञान का आदान-प्रदान के साथ इसमें आ रही चुनौतियों पर चर्चा होगी।
इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिकों के अलावा बीज संस्थानों व विश्वविद्यालयों के शोध छात्र आदि शामिल होंगे। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (एनएसआरटीसी) और अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) की ओर से यह सम्मेलन आयोजित किया गया है। इरी की निदेशक डॉ. यवोन पिंटो ने इस राष्ट्रीय बीज कांग्रेस कृषि में नवाचार और साझेदारी को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ेगा। इससे बीज प्रणाली और किसानों के जीवन को सशक्त बनाएंगे।
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आईसार्क के निदेशक सुधांशु सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुबह 9:30 बजे से कार्यक्रम शुरू हो जाएगा। उद्घाटन 2:30 बजे से होगा। देश की बीज नीति को वैश्विक चुनौतियों जैसे खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और संसाधन प्रबंधन आदि पर चर्चा होगी। वैज्ञानिकों के अलावा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, बीज कंपनियों, बीज के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्थानों, शोध छात्रों सहित सात सौ अधिक प्रतिनिधि आएंगे। साथ नेपाल, फिलीपींस, बांग्लादेश के भी प्रतिनिधि भाग लेंगे। उद्घाटन समारोह में कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, अतिरिक्त सचिव शुभा ठाकुर, इरी के उपमहानिदेशक (अनुसंधान) डॉ. अजय कोहली मौजूद रहेंगे।
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विभिन्न सत्रों में करेंगे चर्चा
राष्ट्रीय बीज कांग्रेस में प्रतिदिन छह से सात सत्र चलेंगे। इसमें जलवायु अनुकूल बीज, नई बीज तकनीक और टिकाऊ कृषि, बीज क्षेत्र में सरकारी और निजी भागीदारी की भूमिका, महिलाओं और युवाओं की भूमिका, चावल के फॉलो क्षेत्रों का उपयोग, डीएसआर जैसे जल बचाने वाले तरीकों, नवीनतम बीज तकनीकों पर चर्चा होगी।
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