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दशानन रूपी समस्याओं का कब होगा दहन

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असत्य पर सत्य की विजय का महापर्व विजयादशमी पर हर साल रावणरूपी दशानन का दहन किया जाता है लेकिन इस महंगाई, बिजली, सड़क, गंदगी और प्रदूषण सहित जैसी तमाम समस्याओंरूपी रावण का दहन कब होगा। इससे लोगों को कब निजात मिलेगी। लोगों का इसका इंतजार है। तमाम दावों के बाद भी लोग सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं।
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महंगाई
महंगाई से लोग हांफ रहे हैं। पेट्रोल-डीजल हो या फिर रसोई गैस, सबके दाम आसमान छू रहे हैं। बेतहाशा महंगाई से आम हो या खास सब बेहाल हैं। गृहणियों को घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। सब्जी से लेकर किराने के सामानों के दाम बढ़ने से लोगों को अब कुछ सुझाई नहीं दे रहा है।
टूटी सड़कें
बारिश के बाद शहर की सड़कें बदहाल हो चुकी हैं। सड़कों को गड्ढामुक्त करने का आदेश शासन से होने के बाद भी गड्ढामुक्त नहीं हो सकी हैं। उड़ती धूल और गड्ढों में चलना मुश्किल है। लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी गड्ढों के भरने के साथ ही पैचिंग का दावा कर रहे हैं मगर अब तक सड़कों पर सुधार नहीं हुआ। निगम और पीडब्ल्यूडी के पास अभियंताओं और कर्मचारियों की लंबी कतार है, चाहते तो समय पर समाधान हो सकता है।
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जाम
नगर मेें जाम की बड़ी और गंभीर समस्या है। सड़कों को चौड़ा करने से लेकर कई फ्लाईओवर का निर्माण भी कराया गया लेकिन शहर में जाम की समस्या कम नहीं हुई। नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन इसका हल अब तक निकाल पाए हैं। संकरी सड़कें, चौराहों पर क्रासिंग, सड़कों पर वाहनों के खड़ा होने से जाम की समस्या बढ़ जाती है। सुनियोजित योजना नहीं होने शहर में जाम से लोग अब भी जूझ रहे हैं।
अतिक्रमण
शहर को अतिक्रमण से निजात दिलाने के लिए कार्ययोजना बनती है। इसे अमल में भी लाया जाता है और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलता है लेकिन विभागीय लापरवाही और उदासीनता के चलते फिर कुछ दिन बाद सड़कों पर दुकानें सज जाती हैं। पटरियों पर सामान रख दिए जाते है। अवैध वाहन स्टैंड, सड़क पर पार्किंग से भी दिक्कत होती है।
पेयजल
पेयजल शहर की गंभीर समस्या है। इस पर करीब तीन दशक से काम हो रहा है लेकिन अब तक घरों को शुद्ध पानी नहीं पहुंचाया जा सका। हाल यह है कि पेयजल पाइप में लीकेज, गंदा और बदबूदार पानी बड़ी समस्या है। क्षतिग्रस्त पाइपों के सहारे पेयजल आपूर्ति से लोगों कील घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
गंदगी
शहर को साफ सुथरा रखने और कचरा निस्तारण की बड़ी समस्या है। नगर निगम में सफाई कर्मियों की लंबी फौज होने के बाद भी नियमित कूड़ा का उठान नहीं हो पा रहा है। कूड़ाघरों के बाहर कचरा फैला रहता है। शहर के 90 वार्डों से रोजाना 600-650 एमटी कूड़ा रोज निकलता है। करसड़ा में निस्तारण की व्यवस्था है फिर भी शहर की गलियों, मुहल्लों में कचरा फैला रहता है। इसके लिए लोगाें को भी समय से कचरा बाहर रखने और खुले में फेंकने से बचना होगा।
अपराध
सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद हो इसके लिए शहर में कमिश्नरेट पुलिस की व्यवस्था हो गई। इसके बाद भी अपराध में कमी नहीं आ रही है। हत्या, साइबर अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। छेड़खानी, दुराचार, छिनैती की वारदातें हो रही हैं। कमिश्नरेट पुलिसिंग के बाद लोगों को लगा कि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी मगर पुलिस इस पर लगाम नहीं लगा सकी है।
प्रदूषण
प्रदूषण के मामले में देश के सर्वाधिक शहरों में शामिल है। यहां का एअर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 300 के ऊपर रहता है। इसकी वजह जगह-जगह हो रहे निर्माण कार्यों, वाहनों से निकलते धुए और कूड़े में लगाई जाने वाली आग से शहर की हवा जहरीली हो जाती है। दीपावली पर तो शहर की आबोहवा विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में वाराणसी शामिल शामिल हो जाता है।
बेरोजगारी
बेराजगारी की समस्या भी सुरसा की तरह मुंह बाए है। सरकार की ओर से मुद्रा योजना, स्टार्टअप से लेकर विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, स्किल डेवलपमेंट से लेकर कई योजनाएं चला रही हैं इसके बाद भी बेरोजगारों की फौज खड़ी हैं। युवा रोजगार मांग रहे हैं।
भ्रष्टाचार
पारदर्शी तरीके से कार्य कराने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद भी न तो भ्रष्टाचार कम हुआ और भ्रष्टाचारी। गैर तरीके से काम करने वालों ने सफेद पोशों का दामन थाम लिया है। यहीं कारण है कि उनपर पुलिसिया कार्रवाई भी नहीं हो पाती है। वहीं पुलिस भी इससे बचना चाहती है।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य की समस्या भी इन दिनों लगातार बढ़ती जा रही है। कोरोना संक्रमण कम होने की वजह से भले ही लोग राहत महसूस कर रहे हो लेकिन इस समय डेंगू का प्रकोप बढ़ गया है। पिछले साल केवल चार मरीज मिले थे लेकिन इस साल अब तक 145 मरीज मिल चुके हैं। जिस तरह से मरीज बढ़ते जा रहे हैं, उस पर नियंत्रण पाना भी स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम के लिए चुनौती बन गई है। इस समस्या से भी निजात पाना मुश्किल होगा।
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