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अपना दायित्व बोध होने पर समाज में होता है व्यवस्था परिवर्तन : चंद्रमोहन

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हिन्दू सम्मेलन *समाज को अपना दायित्व बोध होने पर व्यवस्था परिवर्तन होता है — चन्द्रमोहन जी**मज - फोटो : पाठक
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व्यक्ति से व्यवस्था बदलती है। व्यवस्थाएं तभी टिकती हैं जब समाज उसे अपना कार्य समझे। समाज को अपना दायित्व बोध होने पर व्यवस्था परिवर्तन होता है। उक्त विचार सकल हिन्दू समाज काशी मध्य भाग की ओर से आयोजित महमूरगंज स्थित शृंगेरी मठ परिसर में मुख्य वक्ता के रूप में आरएसएस के क्षेत्र ग्राम्य विकास संयोजक चंद्रमोहन ने कहीं।
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उन्होंने कहा कि बाबा साहेब आप्टे का विचार था कि किसी कार्य को करने के लिए कुछ लोग सारा समय दें और सारे लोग कुछ समय दें। 100 वर्षों से इसी कार्य पद्धति का पालन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्ति निर्माण, व्यवस्था परिवर्तन और समाज परिवर्तन कर रहा है। जिसका परिणाम अब दिखने लगा है। व्यवस्था परिवर्तन के लिए वक्ता ने पंच परिवर्तन को महत्वपूर्ण माना। मुख्य अतिथि गोविंद मठ के महंत स्वामी जगदीश्वरानंद महाराज ने कहा कि कई देशों ने भारतवर्ष को तोड़ने का प्रयास किया। वर्तमान के वर्षों में भी भारत के नागरिकों को तोड़ने का प्रयास हुआ है। जातियों में बांटने का यह प्रयास अक्षम्य है।
विशिष्ट अतिथि नीरजा माधव ने कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी को उनका बल स्मरण कराना पड़ता है, उसी प्रकार हिंदू समाज को भी उसका गौरव बताना पड़ता है। धन्यवाद ज्ञापन डा. आरके ओझा ने किया। संयोजन अरविंद रस्तोगी और संचालन अंशु व विवेक ने किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रचारक श्याम, काशी विभाग कार्यवाह राजेश, अनिल किंजवाडेकर, प्रदीप चौरसिया, शिव प्रसन्न आदि मौजूद रहे। उधर, काशी दक्षिण भाग के कर्दमेश्वर नगर के अमरेश्वर महादेव मंदिर खैरा में हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ता अरविंद ने प्रांत गौ सेवा प्रमुख काशी प्रांत ने हिंदू और हिंदुत्व को स्पष्ट करते हुए उपस्थित हिंदुओं को अपने धर्म और कर्म के लिए जागरूक और प्रेरित किया। अध्यक्षता महेंद्र और संचालन रामाशीष ने किया। कार्यक्रम का समापन वंदेमातरम और भारत माता आरती के साथ हुआ।
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