बीएचयू हिंदी विभाग के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित दो दिवसीय वेबिनार में पुरातन छात्रों और विद्वानों ने विभाग के जुड़ी यादों के साथ ही उपलब्धियों की चर्चा की। समापन समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि हिंदी भाषा को आसान तकनीकी शब्दावली के विकास की जरूरत है। इसके लिए लोगों को आगे आना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने बीएचयू से छात्र जीवन से जुड़े अपने संस्मरण को भी सुनाया। उन्होंने बताया कि हमेशा यह कोशिश रहती है कि राजभाषा के प्रसार के लिए कामकाज किया जाए और पूर्व में मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री रहते हुए इसके लिए प्रयास भी किया गया। अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि हिंदी साहित्य विमर्श भाषा तो रही है, अब जरूरत है हिंदी को विज्ञान और तकनीकी भाषा बनाने की।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ हेमंत शर्मा ने कहा कि हिंदी अकादमिकता के इतिहास से बीएचयू को अलग कर दिया जाए तो शायद ही उसका कोई इतिहास रहे। प्रोफेसर आनंद वर्धन शर्मा ने भी अपने छात्र जीवन को याद करते हुए प्रोफेसर रामदरश मिश्र की कविता की पंक्तियों का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ.सत्यपाल शर्मा, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी ने किया। इस दौरान प्रो. दिलीप सिंह, प्रो. नंद किशोर पांडेय, प्रो. राममोहन पाठक, प्रो. राजकुमार, प्रो. सदानंद शाही, प्रोऱामकली सर्राफ आदि मौजूद रहे।