कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष जिले में 31529 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। खेती के लिए जिले के अधिकांश किसानों ने जून में ही धान की नर्सरी डाल दी थी। बारिश न होने से किसानों को नर्सरी की सिंचाई करना भी मुश्किल हो गया है।
साधन संपन्न जिन किसानों की नर्सरी तैयार हो गई है उन्होंने धान की रोपाई तो शुरू कर दी है लेकिन जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं हैं वे आसमान की तरफ टकटकी लगाए हैं। बारिश न होने से किसान खरीफ की अन्य फसल अरहर, मक्का, उड़द आदि की भी बोआई नहीं कर पा रहे हैं। बांधों में भी पर्याप्त पानी न होने से किसानों को चिंता सता रही है।